एक था डॉक्टर एक था संत – अरुन्धति रॉय

199.00

एक था डॉक्टर एक था संत

अरुन्धति रॉय

वर्तमान भारत में असमानता को समझने और उससे निपटने के लिए, अरुंधति रॉय ज़ोर दे कर कहती हैं कि हमें राजनीतिक विकास और एम.के. गांधी का प्रभाव, दोनों का ही परीक्षण करना होगा। सोचना होगा कि क्यों बी.आर. आंबेडकर द्वारा गांधी की लगभग दैवीय छवि को दी गई प्रबुद्ध चुनौती को भारत के कुलीन वर्ग द्वारा दबा दिया गया। राय के विश्लेषण में, हम देखते हैं कि न्याय के लिए आंबेडकर की लड़ाई, जाति को सुदृढ़ करनेवाली नीतियों के पक्ष में, व्यवस्थित रूप से दरकिनार कर दी गई, जिसका परिणाम है वर्तमान भारतीय राष्ट्र जो आज ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र है, विश्वस्तर पर शक्तिशाली है, लेकिन आज भी जो जाति व्यवस्था में आकंठ डूबा है।

पृष्ठ-184 रु199

✅ SHARE THIS ➷

Description

ek-tha-doctor-ek-tha-sant

एक था डॉक्टर एक था संत – अरुन्धति रॉय

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “एक था डॉक्टर एक था संत – अरुन्धति रॉय”

Your email address will not be published. Required fields are marked *