प्रशासन

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  • स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें

    स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें

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    स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें

    डैनियल स्मिथ

    सिलिकाॅन वैली के सबसे मेहनती व्यक्ति का अनुसरण करने की प्रेरणा पाएँ और यह सीखें कि कैसे: – नियम तोड़ते हुए यथास्थिति को चुनौती दें – अपने संदेश को प्रखर बनाएँ और प्रतिस्पर्धा में आगे बने रहें – अपना और अपने विचारों का प्रचार करें – हमेशा नए अवसरों की तलाश में रहें – अपने मनचाहे परिणाम पाएँ

    STEVE JOBS KI TARAH KAISE SOCHE

    पृष्ठ 188  रु195

    195.00
  • भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी संस्करण

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    भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी संस्करण

    भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी में

    भारत का संविधान अब हिंदी और अंग्रेजी में । अथवा 2020 के 104वें संशोधन तक के नए संशोधनों को भी शामिल किया गया है। यह उन हिंदी पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया हैं जो हमारे संविधान को अपनी मातृभाषा (हिन्दी अथवा अंग्रेजी)में पढ़ना पसंद करते हैं।

    अद्यतन संस्करण, 2020 दिसंबर तक

    Constitution of India In English and Hindi. Updated up to 104th amendments of 2020
    (Print Edition)

    Bharat Ka Samvidhan / Bharat Ka Sanvidhan

    पृष्ठ 824   रु900

    900.00
  • हमारा पंचायती राज – प्रतापमल देवपुरा

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    हमारा पंचायती राज – प्रतापमल देवपुरा

    हमारा पंचायती राज
    प्रतापमल देवपुरा

    भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। ग्राम-व्यवस्था वस्तुतः राष्ट्र-व्यवस्था की बुनियाद है। यही कारण है कि हमारे राष्ट्रनायकों ने सामाजिक उन्नयन, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक प्रगति और राजनीतिक चेतना की दृष्टि से गाँवों को पर्याप्त महत्त्व दिया है। सबका मानना है कि भारत के विकास का रास्ता गाँवों से होकर गुज़रता है। महात्मा गांधी के श्रम, स्वदेशी और स्वावलम्बन की कर्मभूमि अधिकांश अर्थ में गाँव ही है।

    प्रतापमल देवपुरा द्वारा लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ पुस्तक पंचायती राज के प्रति जानकारी व जागरूकता उत्पन्न करने हेतु लिखी गई है। पुस्तक जनप्रतिनिधियों से लेकर सामान्य नागरिकों के लिए सामाजिक रूप से उपयोगी है। 50 छोटे-छोटे अध्यायों में पंचायती राज से जुड़ी विभिन्न जिज्ञासाओं व जानकारियों की सूत्र-शैली में प्रस्तुति सकारण है। इस पद्धति से सूचनाएँ सरलता से प्राप्त हो जाती हैं। जैसे ‘सूचना का अधिकार’ के अन्तर्गत पहला सूत्र है, ‘सूचना के अधिकार का अर्थ है—नागरिकों द्वारा सूचना माँगने पर सूचना मिले जिससे उसका जीवन बेहतर एवं सुरक्षित बने; इसके साथ ही सरकारी विभागों द्वारा सूचना देने का कर्तव्य।’

    सरल व सुबोध भाषा में लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ अत्यन्त जनोपयोगी पुस्तक है।

    पृष्ठ 108 रु300

    300.00
  • आओ चलें ग्रामसभा – प्रतापमल देवपुरा

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    आओ चलें ग्रामसभा – प्रतापमल देवपुरा

    आओ चलें ग्रामसभा
    प्रतापमल देवपुरा

    आपको गाँवों के पंचायतीराज के बारे में जानने-समझने की जिज्ञासा रहती है। पंचायतें किस प्रकार कार्य करती हैं? इनका ढाँचा कैसा है? ग्राम पंचायत क्‍या है? हमारे देश में पंचायतीराज की व्‍यवस्‍था किस प्रकार की है? ग्रामसभा में क्‍या होता है? पंचायत विकास के कौन से कार्य करवाती है? कार्यों की निगरानी पंचायतें कैसे करती हैं? मनरेगा योजना में कैसे काम होता है?—इन सभी प्रश्‍नों के उत्‍तर आपको इस पुस्‍तक में पढ़ने को मिलेंगे। ये सारी जानकारियाँ ‘पंचायतीराज की छह कहानियों’ के माध्‍यम से दिया गया हैं। आपको पंचायत की नई-नई जानकारियाँ मिलेंगी। बाद की तीन कहानियों में जंगल में चुनाव के बहाने आपको यह जानने का मौक़ा भी मिलेगा कि चुनाव में क्‍या गड़बड़ियाँ होती हैं। अगली कहानियों में हमारे देश की जनगणना की ख़ास बातें भी पता लगेंगी। थर्मामीटर, सिलाई मशीन, बल्‍ब की कहानियाँ आपको विज्ञान की खोजों में आनेवाली कठिनाइयों का पता भी देंगी। साथ ही यह बताएँगी कि निरन्‍तर परिश्रम करके कठिनाइयों पर कैसे पार पाया जा सकता है। दो कहानियों में बैंक से लेन-देन की विधि भी जान पाएँगे। ‘प्‍याऊ-परम्‍परा’ को जीवित करने पर ज़ोर देती एक कहानी है। कहानियाँ सरल भाषा में लिखी गई हैं। एक बहुत ही महत्वपूर्ण कृति।

    पृष्ठ 112 रु300

    300.00
  • स्वच्छ भारत मिशन – प्रतापमल देवपुरा

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    स्वच्छ भारत मिशन – प्रतापमल देवपुरा

    स्वच्छ भारत मिशन
    प्रतापमल देवपुरा

    भारत के प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त, 2014 को देश में स्वच्छता कार्यक्रम पर ज़ोर देते हुए एक विराट स्वच्छता अभियान की नींव रखी गई। इसके तहत उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि न तो हम स्वयं गन्दगी फैलाएँ और न किसी को फैलाने दें।

    देश भर में शौचालयों का निर्माण तथा खुले में शौच न करने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने के लिए व्यापक पैमाने पर प्रचार अभियान भी इसका हिस्सा था।

    इस पुस्तक में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की सांगोपांग जानकारी दी गई है। इस अभियान के तहत चिकित्सालयों, शिक्षण संस्थाओं, रेलवे तथा बस स्टैंड की सफ़ाई, पानी और परम्परागत जल-भंडारों आदि सभी स्थानों पर सफ़ाई के महत्त्व तथा पद्धति को स्पष्ट किया गया है।

    यह पुस्तक स्वच्छ भारत मिशन की निर्देशिका है जिससे आप इस अभियान से जुड़ी हर जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    पृष्ठ 72 रु250

    250.00
  • ग्रामीण विकास का आधार : आत्मनिर्भर पंचायतें – प्रतापमल देवपुरा

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    ग्रामीण विकास का आधार : आत्मनिर्भर पंचायतें – प्रतापमल देवपुरा

    ग्रामीण विकास का आधार : आत्मनिर्भर पंचायतें
    प्रतापमल देवपुरा

    संविधान में 73वें संशोधन के बाद यह उम्मीद की गई कि देश के लाखों गाँवों में पंचायती राज की स्थापना से गाँवों के कष्ट दूर होंगे। विकास की बहुत उम्मीदें भी लगाई गईं, आरक्षण से गाँवों के पिछड़ों, महिलाओं के लिए स्थान भी सुरक्षित किए गए, पर हुआ क्या? क्या बिना साधनों के विकास सम्भव होगा? पंचायतों को अधिकार एवं ज़िम्मेदारियाँ तो सौंप दी गईं, परन्तु आवश्यक वित्त प्रबन्ध नहीं हुआ। यदि हुआ भी तो इतना कमज़ोर कि उससे दैनिक ख़र्चा भी नहीं निकल सकता है। ऐसे में पंचायतों के पास क्या विकल्प है? किन साधनों का कैसे विकास हो? इन्हीं सब मुद्दों पर इस पुस्तक में विचार किया गया है। इसमें यह बात प्रमुखता से उभरकर आती है कि आत्मनिर्भरता से ही विकास करना व ग़रीबी हटाना सम्भव होगा।

    पुस्तक में पंचायत की सफलता की कहानियाँ, कार्टून, चित्र, सारणियाँ एवं आरेखों के द्वारा विषय को रोचक बनाने का प्रयास किया गया है, ताकि ग्रामीण पृष्ठभूमि के कम पढ़े-लिखे पाठक भी इसे आसानी से पढ़ सकें और आत्मसात् कर सकें।

    पृष्ठ 231 रु250

    250.00
  • पंचायती राज के नए आयाम – प्रतापमल देवपुरा

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    पंचायती राज के नए आयाम – प्रतापमल देवपुरा

    पंचायती राज के नए आयाम
    प्रतापमल देवपुरा

    प्रतापमल देवपुरा भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। ग्राम-व्यवस्था वस्तुतः राष्ट्र-व्यवस्था की बुनियाद है। यही कारण है कि हमारे राष्ट्रनायकों ने सामाजिक उन्नयन, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक प्रगति और राजनीतिक चेतना की दृष्टि से गाँवों को पर्याप्त महत्त्व दिया है। सबका मानना है कि भारत के विकास का रास्ता गाँवों से होकर गुज़रता है। महात्मा गांधी के श्रम, स्वदेशी और स्वावलम्बन की कर्मभूमि अधिकांश अर्थ में गाँव ही हैं।

    प्रतापमल देवपुरा द्वारा लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ पुस्तक पंचायती राज के प्रति जानकारी व जागरूकता उत्पन्न करने हेतु लिखी गई है। पुस्तक जनप्रतिनिधियों से लेकर सामान्य नागरिकों के लिए समाजिक रूप से उपयोगी है। 50 छोटे-छोटे अध्यायों में पंचायती राज से जुड़ी विभिन्न जिज्ञासाओं व जानकारियों की सूत्र-शैली में प्रस्तुति सकारण है। इस पद्धति से सूचनाएँ सरलता से प्राप्त हो जाती हैं। जैसे ‘सूचना का अधिकार’ के अन्तर्गत पहला सूत्र है, ‘सूचना के अधिकार का अर्थ है नागरिकों द्वारा सूचना माँगने पर सूचना मिले जिससे उसका जीवन बेहतर एवं सुरक्षित बने; इसके साथ ही सरकारी विभागों द्वारा सूचना देने का कर्तव्य।’

    सरल व सुबोध भाषा में लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ अत्यन्त जनोपयोगी पुस्तक है।

    पृष्ठ 144 रु250

    250.00
  • गाँव का विकास – प्रतापमल देवपुरा

    300.00
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  • भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी संस्करण

    899.00
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    भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी संस्करण

    भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी में

    भारत का संविधान अब हिंदी और अंग्रेजी में । अथवा 2020 के 104वें संशोधन तक के नए संशोधनों को भी शामिल किया गया है। यह उन हिंदी पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया हैं जो हमारे संविधान को अपनी मातृभाषा (हिन्दी अथवा अंग्रेजी)में पढ़ना पसंद करते हैं।

    अद्यतन संस्करण, 2020 दिसंबर तक

    Constitution of India In English and Hindi. Updated up to 104th amendments of 2020
    (Print Edition)

     

    पृष्ठ 824   रु899

    899.00
  • भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी संस्करण

    899.00
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    भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी संस्करण

    भारत का संविधान – हिंदी और अंग्रेजी में

    भारत का संविधान अब हिंदी और अंग्रेजी में । अथवा 2020 के 104वें संशोधन तक के नए संशोधनों को भी शामिल किया गया है। यह उन हिंदी पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया हैं जो हमारे संविधान को अपनी मातृभाषा (हिन्दी अथवा अंग्रेजी)में पढ़ना पसंद करते हैं।

    अद्यतन संस्करण, 2020 दिसंबर तक

    यह भारत का सर्वोच्च कानून व्यवस्था है। यह बुनियादी राजनीतिक संहिता, संरचना, प्रक्रियाओं, शक्तियों,और सरकारी संस्थानों के कर्तव्य और नागरिकों के मौलिक अधिकारों, निर्देशक सिद्धांतों और कर्तव्यों को निर्धारित करता है।

    केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य में, सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि एक संशोधन संविधान की मूल संरचना के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है, जो अपरिवर्तनीय है। इस तरह के संशोधन को अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।सिद्धांत के अनुसार, संविधान की बुनियादी विशेषताएं (जब “पूरी तरह से पढ़ी जाती हैं”) को संक्षिप्त या समाप्त नहीं किया जा सकता है।

    केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के निर्णय ने संविधान की मूल संरचना निर्धारित की, जो बहुत असाधारण है:

    * संविधान की सर्वोपरिता
    * गणतंत्रवादी, सरकार का लोकतांत्रिक स्वरूप
    * इसकी धर्मनिरपेक्ष प्रकृति
    * अधिकारों का विभाजन

    इसका तात्पर्य यह है कि संसद अपने मूल ढांचे को बदले बिना ही संविधान में संशोधन कर सकती है। न्यायतंत्र समीक्षा के बाद, यदि इसका उल्लंघन किया जाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय संशोधन को अमान्य घोषित कर सकता है। यह संसदीय सरकारों की खासियत है, जहां न्यायपालिका संसदीय शक्ति की जांच करती है।

    एक सार्वभौम राष्ट्र के लिए भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा संविधान है।
    यह उन लोगों को समर्पित जो हमारे संविधान को अपनी मातृभाषा में पढ़ना चाहते हैं।

    [Delux Print Edition]  पृष्ठ 824   रु899

    899.00