व्यक्तित्व विकास

Showing 1–24 of 27 results

Show Grid/List of >5/50/All>>
  • रिच डैड पुअर डैड

    रिच डैड पुअर डैड

    399.00
    Add to cart

    रिच डैड पुअर डैड

    रोबर्ट टी कियोसाकि

    रॉबर्ट कियोसाकी का ‘रिच डैड पुअर डैड’ अब तक की व्यक्तिगत  # 1 वित्तीय पुस्तक बन गया है, जिसका दर्जनों भाषाओं में अनुवाद किया गया और दुनिया भर में बेचा गया।

    ‘सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब’

    यह बेस्टसेलिंग पुस्तक सरल भाषा में सिखाती है कि पैसे की सच्चाई क्या है और अमीर कैसे बना जाता है। लेखक के अनुसार दौलतमंद बनने की असली कुंजी नौकरी करना नहीं है, बल्‍कि व्यवसाय या निवेश करना है।

    रॉबर्ट कियोसाकी अंतरराष्ट्रीय भगोड़ा बेस्टसेलर जिसने छह वर्षों से अधिक समय तक न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्टसेलर सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है – एक निवेशक, उद्यमी और शिक्षक हैं, जिनके पैसे और निवेश के दृष्टिकोण चेहरे पर उड़ते हैं।

    डिलीवरी पर नकद / ऑनलाइन पेमेंट  उपलब्ध
    पृष्ठ 215   रु399

    399.00
  • स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें

    स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें

    195.00
    Add to cart

    स्टीव जॉब्स की तरह कैसे सोचें

    डैनियल स्मिथ

    सिलिकाॅन वैली के सबसे मेहनती व्यक्ति का अनुसरण करने की प्रेरणा पाएँ और यह सीखें कि कैसे: – नियम तोड़ते हुए यथास्थिति को चुनौती दें – अपने संदेश को प्रखर बनाएँ और प्रतिस्पर्धा में आगे बने रहें – अपना और अपने विचारों का प्रचार करें – हमेशा नए अवसरों की तलाश में रहें – अपने मनचाहे परिणाम पाएँ

    STEVE JOBS KI TARAH KAISE SOCHE

    पृष्ठ 188  रु195

    195.00
  • छुआ आसमान

    छुआ आसमान

    199.00
    Add to cart

    छुआ आसमान

    ए पि जे अब्दुल कलाम

    लेखक ने भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति डा. अब्दुल कलाम के जीवन के अनछुए पहलुओं को सँजोया है। यह कहानी जितनी डा. कलाम के अपने गुमनामी से उत्थान एवं उनके व्यक्‍तिगत एवं व्यावसायिक संघर्षो की है, उतनी ही स्वतंत्र भारत के रक्षा टेक्नोलाजी में आत्म-निर्भरता के लिए संघर्ष की गाथा भी है। आप जानेंगे एक अदभुत प्रेरक व्यक्‍तित्व एवं भारतीयों के आदर्श नायक के छात्र-जीवन, युवावस्था एवं प्रेरणा-स्त्रोतों के बारे में।

    CHOOA AASMAAN

    पृष्ठ 96  रु199

    199.00
  • क्यों अलग है स्त्री-पुरुष का प्रेम – अबरार मुल्तानी

    क्यों अलग है स्त्री-पुरुष का प्रेम – अबरार मुल्तानी

    175.00
    Add to cart

    क्यों अलग है स्त्री-पुरुष का प्रेम – अबरार मुल्तानी

    क्यों अलग है स्त्री-पुरुष का प्रेम

    अबरार मुल्तानी

    प्रेम जीवन का अनिवार्य विषय है। जीवनसाथी से प्रेमपूर्ण सम्बन्ध जीवन की सफलता और आनन्द का मूल है। हम सभी प्रेम करना और पाना चाहते हैं लेकिन उसे सीखना नहीं चाहते। जीवन का एक बहुत बड़ा और महत्त्वपूर्ण सबक़ हमें कोई भी नहीं सिखाता। इसके लिए स्कूल और कॉलेजों में कोई विषय नहीं है और ना कोई अध्यापक। अगर हम प्रेम के बारे में थोड़ा-बहुत जानते भी हैं तो वही फ़िल्मों वाला प्रेम या दोस्तों की गप्पें, यह दोनों ही ज्ञान अपूर्ण और भ्रामक होते हैं जो कि हमारे प्रेम को ग़लत दिशा में ले जाते हैं और शादियाँ तलाक़ में या फिर कारावास में बदल जाती हैं।

    स्त्री और पुरुषों में भिन्नताएँ होती हैं, वे अलग होते हैं, चाँद और सूरज की ही तरह अलग-अलग। इन दोनों की वैचारिक भिन्नताएँ आग और पानी की ही तरह अलग-अलग होती हैं। पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका अपने प्रेम को हमेशा क़ायम रख ही नहीं सकते जब तक कि वे एक दूसरे की भिन्नताओं को जानकर उन्हें स्वीकार ना कर लें। यह पुस्तक इन्हीं भिन्नताओं को उजागर करेगी, आपको प्रेम करना और उसे जीवन-भर क़ायम रखना सिखाएगी। यह पुस्तक आपकी गुरु, साथी और एक मार्गदर्शक के रूप में आपकी हमेशा मदद करेगी। यह आपको वह सिखाएगी जो दुनिया के अधिकतर लोगों को नहीं आता—जी हाँ, ‘प्रेम करना’!

    पृष्ठ-200 रु175

    175.00
  • व्यक्तित्व निर्माण - रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    व्यक्तित्व निर्माण – रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    199.00
    Add to cart

    व्यक्तित्व निर्माण – रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    व्यक्तित्व निर्माण

    रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    पृष्ठ-174 रु199

    199.00
  • 5 पिल्स डिप्रेशन-स्ट्रेस से मुक्ति के लिए - अबरार मुल्तानी

    5 पिल्स डिप्रेशन-स्ट्रेस से मुक्ति के लिए – अबरार मुल्तानी

    150.00
    Add to cart

    5 पिल्स डिप्रेशन-स्ट्रेस से मुक्ति के लिए – अबरार मुल्तानी

    5 पिल्स डिप्रेशन-स्ट्रेस से मुक्ति के लिए

    अबरार मुल्तानी

    निराशा के समन्दर में गोते लगाते लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि ईश्वर ने हमें एक अद्वितीय मस्तिष्क दिया है, जो हमें कुछ भी प्राप्त करवा सकता है। हाँ, कुछ भी, जो भी हम पाना चाहें। अपनी क्षमताओं को शून्य मानकर स्वयं पर आई हुई मुसीबतों के बारे में सोच-सोचकर उनके सामने घुटने टेक देने को ही अवसाद कहते हैं और आजकल हम मनुष्यों में यह घुटने टेकने की प्रवृत्ति ही बढ़ती जा रही है।

    हम परेशान हैं, हम चिन्तित हैं, हम तनाव में हैं, हम अवसाद में हैं, हम चिड़चिड़े हो गए हैं, हम क्रोधित छवि बना चुके हैं…क्यों? क्योंकि हम ख़ुद से कभी नहीं पूछते कि ‘आख़िर क्यों हम इन सब समस्याओं में उलझ गए?’ यह किताब इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए लिखी गई है। तनाव और डिप्रेशन से यह किताब बिना किसी पिल्स (गोलियों) के ही मुक्ति दिलवाने में सक्षम है। यह कपोल कल्पना नहीं वरन् एक अत्यन्त व्यावहारिक पुस्तक है जो कि लेखक द्वारा हज़ारों रोगियों को दिए गए सफल क्लिनिकल परामर्शों से प्राप्त अनुभव पर आधारित है।

    पृष्ठ-144 रु150

    150.00
  • आओ विवेकशील बनें - नरेंद्र दाभोलकर

    आओ विवेकशील बनें – नरेंद्र दाभोलकर

    150.00
    Add to cart
  • अच्छा वक्ता कैसे बनें? - शिवप्रसाद बागड़ी

    अच्छा वक्ता कैसे बनें? – शिवप्रसाद बागड़ी

    80.00
    Add to cart

    अच्छा वक्ता कैसे बनें? – शिवप्रसाद बागड़ी

    अच्छा वक्ता कैसे बनें?

    शिवप्रसाद बागड़ी

    अभिव्यक्ति के प्रत्यक्ष और सबसे सशक्त माध्यम ‘भाषण’ के मनोविज्ञान पर यह उपयोगी व महत्त्वपूर्ण पुस्तक न केवल विद्यार्थियों के लिए ज़रूरी है, बल्कि उन उच्च पदासीन लोगों के लिए भी अनिवार्य है जो भाषण देने से परहेज़ करते हैं। वस्तुतः भाषण एक सकारात्मक मनःस्थिति से पैदा होता है जिसके संगठन में दृढ़ इच्छा-शक्ति और आत्मविश्वास के अलावा विचारों की चयनात्मकता, आकार व प्रस्तुति आदि आवश्यक हैं। और यह तय है कि अपने आप को अभिव्यक्त कर सकने का सुख जीवन में आशा, उत्साह और प्रसन्नता भरता है जो सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है।

    पृष्ठ-86 रु80

    80.00
  • अध्ययन कैसे करें ? - शिवप्रसाद बागड़ी

    अध्ययन कैसे करें ? – शिवप्रसाद बागड़ी

    99.00
    Add to cart

    अध्ययन कैसे करें ? – शिवप्रसाद बागड़ी

    अध्ययन कैसे करें ?

    शिवप्रसाद बागड़ी

    जीवन में सफल होने के लिए अध्ययन आवश्यक है। शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व को संस्कारित और मन को परिष्कृत करती है। शिक्षा से ही हम स्वयं को समाज और देश के लिए उपयोगी बनाते हैं। हमारे सर्वांगीण विकास में हमारी बुद्धि, चेतना और विवेक का विकास भी शामिल है जिसके लिए सम्यक् अध्ययन ज़रूरी है।

    ‘अध्ययन कैसे करें?’ पुस्तक छात्रों की अध्ययनगत समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। साधारणतः अध्ययन की सफलता के लिए कुछ ऐसे तरीक़े अपनाए जा सकते हैं जिन्हें अध्ययन, अध्यापन और परीक्षाओं के दीर्घ अनुभवों का नतीजा कहा जा सकता है। इस पुस्तक में शिवप्रसाद बागड़ी ने कुछ ऐसी तकनीकें प्रस्तुत की हैं जिनके द्वारा कोई भी विद्यार्थी आसानी से किसी भी विषय को समझ सकता है और लम्बे समय तक याद रख सकता है।

    पृष्ठ-104 रु99

    99.00
  • उत्कृष्ट प्रबंधन के रूप - सुरेश कांत

    उत्कृष्ट प्रबंधन के रूप – सुरेश कांत

    125.00
    Add to cart

    उत्कृष्ट प्रबंधन के रूप – सुरेश कांत

    उत्कृष्ट प्रबंधन के रूप

    सुरेश कांत

    प्रबन्धन आत्म-विकास की एक सतत प्रक्रिया है। अपने को व्यवस्थित-प्रबन्धित किए बिना आदमी दूसरों को व्यवस्थित-प्रबन्धित करने में सफल नहीं हो सकता, चाहे वे दूसरे लोग घर के सदस्य हों या दफ़्तर अथवा कारोबार के। इस प्रकार आत्म-विकास ही घर-दफ़्तर, दोनों की उन्नति का मूल है। इस लिहाज़ से देखें, तो प्रबन्धन का ताल्लुक़ कम्पनी-जगत के लोगों से ही नहीं, मनुष्य मात्र से है। वह इनसान को बेहतर इनसान बनाने की कला है, क्योंकि बेहतर इनसान ही बेहतर कर्मचारी, अधिकारी, प्रबन्धक या कारोबारी हो सकता है।

    ‘उत्कृष्ट प्रबन्धन के रूप’ को विषयानुसार चार उपखंडों में विभाजित किया गया है : स्व-प्रबन्धन, नेतृत्व-कला, औद्योगिक सम्बन्ध तथा कॉरपोरेट-संस्कृति। प्रबन्धन कौशल के विशेषज्ञ लेखक ने इस पुस्तक में आत्मसम्मान, वैचारिक स्पष्टता, सफलता और विफलता की अवधारणा, व्यावसायिक निर्णय-प्रक्रिया में धैर्य और प्राथमिकता-क्रम की अहमियत, रचनात्मक दृष्टिकोण, प्रबन्धन के मानवीय पहलू, कर्मचारियों में सकारात्मक नज़रिया तथा प्रतिभा का सदुपयोग आदि बिन्दुओं पर व्यावहारिक कोण से विचार किया है।

    प्रबन्धन के विद्यार्थियों और आम पाठकों के लिए एक मार्गदर्शक पुस्तक।

    पृष्ठ-184 रु125

    125.00
  • कुशल प्रबंधन के सूत्र - सुरेश कांत

    कुशल प्रबंधन के सूत्र – सुरेश कांत

    150.00
    Add to cart

    कुशल प्रबंधन के सूत्र – सुरेश कांत

    कुशल प्रबंधन के सूत्र

    सुरेश कांत

    ‘कुशल प्रबन्धन के सूत्र’ पर सुरेश कांत के दैनिक ‘अमर उजाला कारोबार’ में हर मंगलवार को प्रकाशित होनेवाले लोकप्रिय साप्ताहिक प्रबन्धन–कॉलम में छपे लेखों में से 40 चुने हुए लेखों का संकलन है। इन लेखों में हिन्दी में पहली बार प्रबन्धन के विभिन्न पहलुओं पर अत्यन्त रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रकाश डाला गया है। स्व–प्रबन्धन, कर्मचारी–प्रबन्धन, कार्यालय–प्रबन्धन, समय–प्रबन्धन, व्यक्तित्व–विकास, औद्योगिक सम्बन्ध, नेतृत्व–कला, कौशल–विकास आदि सभी पक्षों पर इनमें इतने सरल, सुबोध और आकर्षक तरीक़े से चर्चा की गई है कि पाठक लेखक के साथ बह चलता है। प्रबन्धन उसके लिए पराया अथवा दुरूह विषय नहीं रह जाता।

    प्रबन्धन लेखक की नज़र में व्यक्तित्व के सतत विकास और जीवन में निरन्तर प्रगति की प्रक्रिया है। आदमी अपना ही परिष्कार न कर सके, अपने घर–परिवार की ही उन्नति न कर सके, तो वह कारोबार या दफ़्तर की प्रगति कैसे सुनिश्चित कर सकेगा? वह अपने को ही न सँभाल सके, तो दूसरों को—कर्मचारियों, ग्राहकों आदि को—क्या सँभाल सकेगा? अच्छा आदमी ही अच्छा कर्मचारी, अधिकारी या प्रबन्धक हो सकता है। अत: प्रबन्धन छात्रों, शोधार्थियों, कारोबारियों, कर्मचारियों–अधिकारियों अथवा प्रबन्धकों से ही ताल्लुक़ नहीं रखता, आम आदमी से भी ताल्लुक़ रखता है। वह कम्पनी–जगत के ही मतलब की चीज़ नहीं, मनुष्य मात्र के मतलब की चीज़ है। वह आदमी को बेहतर आदमी बनाने की कला है।

    सुरेश कांत ने अपना लक्ष्य–समूह कॉरपोरेट–दुनिया के आदमी को ही नहीं, पूरी दुनिया के हर आदमी को मानकर इस विषय की प्रस्तुति की है। एक सफल, सिद्धहस्त रचनाकार होने के कारण वे इस विषय में लालित्य भरने में कामयाब रहे हैं। अपने विशद अध्ययन, गहरे ज्ञान और असरदार लेखन–शैली के बल पर वह इस विषय को हिन्दी में जन–जन में लोकप्रिय बनाने में सफल रहे हैं।

    आप चाहे कोई भी हों, इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आप वही नहीं रह जाएँगे, जो आप इसे पढ़ने से पहले थे। एक बहुत ही ज़रूरी और महत्त्वपूर्ण पुस्तक।

    पृष्ठ-168 रु150

    150.00
  • कैसे बने बालक संस्कारी और स्वस्थ - प्रेम भार्गव

    कैसे बने बालक संस्कारी और स्वस्थ – प्रेम भार्गव

    195.00
    Add to cart

    कैसे बने बालक संस्कारी और स्वस्थ – प्रेम भार्गव

    कैसे बने बालक संस्कारी और स्वस्थ

    प्रेम भार्गव

    जिज्ञासा मानव-विकास की आदि एवं मूलभूत आवश्यकता है। उसकी रक्षा से ही हम समाज को विकसित, सम्पन्न एवं उन्नत बना सकते हैं। पर प्रायः देखा जाता है कि व्यस्त माता-पिता बच्चों के प्रश्नों से खीज जाते हैं और उनको सदैव अपने काम में बाधा उपस्थित करनेवाले प्राणी समझते हैं। उनको उद्दंड और मूर्ख ठहराकर उन्हें चुप करा देते हैं और उनकी जिज्ञासा प्रवृत्ति को कुचल देते हैं। ऐसे बालक ख़ुद को उपेक्षित, अनभीष्ट और प्रेमवंचित महसूस करते हैं। इसका परिणाम बहुत ही भयावह होता है। बालक संसार में सुरक्षा और स्थिरता चाहता है। बालक के भावनात्मक विकास के लिए पिता के अधिकार, माँ के ममत्व और भाई-बहन की उदारता एवं सौहार्द की बहुत आवश्यकता है। ऐसा न होने पर उसके मन में भाँति-भाँति की ग्रन्थियाँ पड़ जाती हैं, जो भविष्य में उसके सारे व्यवहारों को प्रभावित करती हैं। कई बार देखा गया है कि पिता के बढ़ते वर्चस्व को देखकर माँ में असुरक्षा की भावना घर करने लगती है। अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए वह अपनी ही बात मनवाना चाहती है, पिता के बीच में बोलने पर रोक देती है, ऐसी स्थिति में बच्चे उद् दंड और बदतमीज़ हो जाते हैं। पिता को अहमियत नहीं देते। इसके विपरीत माँ के डाँटने-मारने के समय यदि पिता बच्चों का पक्ष लेता है तब भी बच्चे बिगड़ जाते हैं और माँ का सम्मान नहीं करते। वास्तव में होना यह चाहिए कि यदि माँ किसी ग़लत बात पर डाँट रही है, तो पिता को चाहिए कि बीच में न बोले और पिता कुछ कह रहा है, तो माँ उस समय चुप रहे।

    पृष्ठ-200 रु195

    195.00
  • जिन्दगी की पिच पर - विजय चितले

    जिन्दगी की पिच पर – विजय चितले

    95.00
    Add to cart

    जिन्दगी की पिच पर – विजय चितले

    जिन्दगी की पिच पर

    विजय चितले

    ‘ज़िन्दगी की पिच पर’ जीवन-प्रबन्धन की तार्किक और सुरुचिपूर्ण पुस्तक है। जीवन का प्रबन्धन अनेक छोटी-छोटी बातों से होता है। अध्ययन के उपरान्त विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करनेवाले व्यक्तियों के लिए अनुभवी लेखक विजय चितले ने इस पुस्तक की रचना की है।

    लेखक का मानना है कि यदि निर्णय लेना, सन्देश वाहन, प्रेरणा, संघर्ष का हल, उत्पादक कार्य, समय प्रबन्धन आदि विषयों को लेकर विद्यार्थियों के भीतर बुनियादी समझ विकसित हो सके तो आगे की राह सुगम व सफल हो जाएगी।

    पुस्तक के हर अध्याय में एक केन्द्रीय विचार है। विचार का वर्णन काव्यात्मक शैली में है जो सीधे हृदय में उतर जाता है। आज के व्यस्त और स्पर्धा से भरे समय में जीने की कला सिखलाती एक सरल और विरल पुस्तक।

    पृष्ठ-128 रु95

    95.00
  • जीवन अनमोल है - रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    जीवन अनमोल है – रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    175.00
    Add to cart

    जीवन अनमोल है – रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    जीवन अनमोल है

    रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह

    पृष्ठ-134 रु175

    175.00
  • परोपकारी बिजनेसमैन अजीम प्रेमजी

    300.00
    Add to cart

    परोपकारी बिजनेसमैन अजीम प्रेमजी

    एन. चोक्कन

    24 जुलाई, 1945 को जनमे हाशिम प्रेमजी अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में जब विद्युत् इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तभी पिता के अचानक निधन के कारण उन्हें स्वदेश लौटकर पारिवारिक व्यवसाय सँभालना पड़ा। उनके व्यापारिक कौशल और योग्यता के बल पर विप्रो ने अनेक क्षेत्रों में कार्य विस्तार किया। प्रसाधन तथा अन्य घरेलू सामग्री में अग्रणी विप्रो आज कंप्यूटर के क्षेत्र में भी भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में सम्मिलित है।
    सरल-सहज अजीम प्रेमजी ने विलक्षण उपलब्धियाँ प्राप्‍त की हैं। सन् 2000 में ‘एशियावीक’ पत्रिका ने उन्हें विश्‍व के 20 सर्वाधिक शक्‍तिशाली व्यक्‍तियों में शामिल किया। वे ‘फोर्ब्स’ की 2001 से 2003 की विश्‍व की 50 सर्वाधिक धनी व्यक्‍तियों की सूची में भी शामिल थे। सन् 2004 में ‘टाइम्स’ पत्रिका ने उन्हें विश्‍व के 100 सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्‍तियों में शामिल किया। सन् 2005 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्‍ठित ‘पद्मभूषण’ से तथा 2011 में ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित किया।
    बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ की स्थापना की। यह बिना लाभवाला संगठन है। इसका उद‍्देश्‍य बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देकर उन्हें ऊपर उठाना, समानता का भाव पैदा करना और उन बच्चों को समाज में सम्मानपूर्वक जीने की कला सिखाना है। इस संगठन की स्थापना 2001 में हुई और देश के 13 राज्यों में यह कार्यशील है।
    ऐसे समाजसेवी, परोपकारी सफल बिजनेसमैन अजीम प्रेमजी की प्रेरक जीवनगाथा। “

    एन. चोक्कन का पूरा नाम नागा सुब्रमण्यन चोक्कनाथन है। वे तमिल भाषा के जानेमाने फ्रीलांस लेखक हैं। तमिल में इनकी तीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। विज्ञान, जीवनी एवं बाल साहित्य इनके प्रिय विषय हैं। इसके अलावा उनकी अनेक पुस्तकों का अंग्रेजी, मलयाळम, गुजराती में भाषांतर हो चुका है।तमिल की पत्र-पत्रिकाओं में इनके लेख-आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं।संप्रति बंगलौर की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।

    पृष्ठ 144  रु300

    300.00
  • महिलाओं की आत्मा के लिए अमृत

    महिलाओं की आत्मा के लिए अमृत – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    250.00
    Add to cart

    महिलाओं की आत्मा के लिए अमृत – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    जैक कैनफ़ील्ड और मार्क विक्टर हैन्सन

    ये आत्मा तक पहुँचने वाली प्रेरक कहानियाँ हैं, जो महिलाओं की जिंदगी की सभी भावनाओं को स्पर्श करती हैं। यह पुस्तक आपके दिल को छू लेगी, और आपका मनोबल बढ़ाएगी।

    MAHILAON KI ATMA KE LIYE AMRIT

    पृष्ठ 274  रु250

    250.00
  • आत्मा के लिए अमृत

    आत्मा के लिए अमृत – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    299.00
    Add to cart

    आत्मा के लिए अमृत – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    जैक कैनफ़ील्ड और मार्क विक्टर हैन्सन

    प्रेरक वक्ता जैक कैनफ़ील्ड और मार्क विक्टर हैन्सन प्रेरणादायी कहानियों का अनूठा संग्रह पेश करते हैं। इस अदभुत पुस्तक की हर कहानी यादगार है। कोई हैरानी नहीं कि इसकी मूल पुस्तक की 80 लाख प्रतियाँ बिक चुकी हैं।

    ATMA KE LIYE AMRIT

    पृष्ठ 278  रु299

    299.00
  • आत्मा के लिए अमृत का दूसरा प्याला

    आत्मा के लिए अमृत का दूसरा प्याला – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    250.00
    Add to cart

    आत्मा के लिए अमृत का दूसरा प्याला – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    जैक कैनफ़ील्ड , मार्क विक्टर हैन्सन

    दिलचस्प और संग्रहणीय कहानियाँ, जिनसे आपको बुद्धिमत्ता और भावनात्मक पोषण की ऐसी खुराक मिलेगी, जो सचमुच अमृत से कम नहीं है। यह पुस्तक जीने का नया अंदाज़ सिखाती है।

    AATMA KE LIYE AMRIT KA DOOSRA PYALA

    पृष्ठ 314  रु250
    250.00
  • माँ की आत्मा के लिए अमृत

    माँ की आत्मा के लिए अमृत – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    250.00
    Add to cart

    माँ की आत्मा के लिए अमृत – जैक कैनफ़ील्ड, मार्क विक्टर हैन्सन

    जैक कैनफ़ील्ड और मार्क विक्टर हैन्सन

    मर्मस्पर्शी और प्रेरक कहानियाँ, जो कि माँ के हर स्वरूप को दर्शाती हैं, और माँ के रिश्ते को सर्वश्रेष्ठ इंसानी रिश्ता होना साबित करती हैं। इसे पढ़कर अपनी माँ के प्रति आपका दृषिटकोण तथा सम्मान और भी व्यापक हो जाएगा।

    MAA KI ATMA KE LIYE AMRIT

    पृष्ठ 272  रु250

    250.00
  • रिटायर यंग रिटायर रिच

    रिटायर यंग रिटायर रिच – रोबर्ट टी कियोसाकि

    499.00
    Add to cart

    रिटायर यंग रिटायर रिच – रोबर्ट टी कियोसाकि

    रोबर्ट टी कियोसाकि

    रिच डैड पुअर डैड के बेस्टसेलिंग लेखक राबर्ट कियोसाकी जवानी में अमीर बनकर रिटायर होने का रास्ता बताते हैं। जानिए कि कियोसाकी शून्य से कैरियर शुरू करके दस साल में अमीर कैसे बने। अगर आप भी जिंदगी में जल्दी ही अमीर बनकर रिटायर होना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आप ही के लिए है।

    RETIRE YOUNG RETIRE RICH

    पृष्ठ 388  रु499

    499.00
  • कैश फ़्लो क्वाड्रैंट

    कैश फ़्लो क्वाड्रैंट – रोबर्ट टी कियोसाकि

    350.00
    Add to cart

    कैश फ़्लो क्वाड्रैंट – रोबर्ट टी कियोसाकि

    रोबर्ट टी कियोसाकि

    जानिए कि कुछ लोग कम मेहनत करके ज्यादा पैसे कैसे कमाते हैं? सही क्वाड्रैंट में काम करने से आप ज्यादा दौलत कमा सकते हैं? यह पुस्तक आपको यह रहस्य बताएगी कि आप तेज़ी से अमीर कैसे बन सकते हैं?

    CASHFLOW QUADRANT

    पृष्ठ 288  रु350

    350.00
  • बिज़नेस स्कूल

    बिज़नेस स्कूल – रोबर्ट टी कियोसाकि

    275.00
    Add to cart

    बिज़नेस स्कूल – रोबर्ट टी कियोसाकि

    रोबर्ट टी कियोसाकि

    अपनी बेस्टसेलिंग पुस्तक के इस द्वितीय संस्करण में लेखक बताते हैं कि अमीर बनने के अलावा नेटवर्क मार्केटिंग के अन्य छुपे हुए फ़ायदे कौन-कौन से हैं। नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़े हर व्यक्‍ति के लिए विशेष उपयोगी।

    BUSINESS SCHOOL

    पृष्ठ 155  रु275

    275.00
  • वन मिनट मैनेजर

    वन मिनट मैनेजर – स्पेनसर जॉनसन , केनथ ब्लन्चर्ड

    95.00
    Add to cart

    वन मिनट मैनेजर – स्पेनसर जॉनसन , केनथ ब्लन्चर्ड

    स्पेनसर जॉनसन , केनथ ब्लन्चर्ड

    इस बेस्टसेलिंग पुस्तक के सिद्धांत इतने उपयोगी हैं कि अमेरिकी और जापानी कंपनियों ने अपने मैनेजरों से इसे अनिवार्य रूप से पढ़ने को कहा है। यह पुस्तक सफल मैनेजर बनने का बहुत आसान तरीक़ा बताती है।

    THE ONE MINUTE MANAGER

    पृष्ठ 111 रु95

    95.00
  • स्वास्थ्य क्रांति

    स्वास्थ्य क्रांति

    395.00
    Add to cart

    स्वास्थ्य क्रांति

    पॉल ज़ेन पिल्ज़र

    विश्‍व-प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और उधमी पाल ज़ेन पिल्ज़र आपको अगले टि्रलियन डालर क्षमता वाले उधोग – स्वास्थ्य – का दोहन करने की राह दिखाते हैं। वे भविष्यवाणी करते हैं कि मौजूदा 200 करोड़ डालर का विटामिन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी वस्तुओं की बिक्री का व्यापार, अगले दस सालों में सालाना 1 टि्रलियन डालर से ज़्यादा तक पहुँच जाएगा। वे बताते हैं कि इस स्वास्थ्य क्रांति में उधमी और निवेशक किस प्रकार अपनी किस्मत आज़मा सकते हैं।

    SWASTHYA KRANTI

    पृष्ठ 348   रु395

    395.00