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  • सेपियन्स - मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास

    सेपियन्स – मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास

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    सेपियन्स – मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास

    डॉ युवाल नोआ हरारी

    डॉ. युवाल नोआ हरारी द्वारा लिखित किताब ‘सेपियन्स’ में मानव जाति के संपूर्ण इतिहास को अनूठे परिप्रेक्ष्य में अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्तुतिकरण अपने आप में अद्वितीय है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक मानव जाति के विकास की यात्रा के रोचक तथ्यों को लेखक ने शोध पर आधारित आँकडों के साथ इस तरह शब्दों में पिरोया है कि यह किताब निश्चित रूप से मॉर्डन क्लासिक किताबों की श्रेणी में शुमार होगी।

    करीब 100,000 साल पहले धरती पर मानव की कम से कम छह प्रजातियाँ बसती थीं, लेकिन आज स़िर्फ हम (होमो सेपियन्स) हैं। प्रभुत्व की इस जंग में आख़िर हमारी प्रजाति ने कैसे जीत हासिल की? हमारे भोजन खोजी पूर्वज शहरों और साम्राज्यों की स्थापना के लिए क्यों एकजुट हुए? कैसे हम ईश्वर, राष्ट्रों और मानवाधिकारों में विश्वास करने लगे? कैसे हम दौलत, किताबों और कानून में भरोसा करने लगे? और कैसे हम नौकरशाही, समय-सारणी और उपभोक्तावाद के गुलाम बन गए? आने वाले हज़ार वर्षों में हमारी दुनिया कैसी होगी? इस किताब में इन्हीं रोचक सवालों के जवाब समाहित हैं।

    ‘सेपियन्स’ में डॉ. युवाल नोआ हरारी ने मानव जाति के रहस्यों से भरे इतिहास का विस्तार से वर्णन किया है। इसमें धरती पर विचरण करने वाले पहले इंसानों से लेकर संज्ञानात्मक, कृषि और वैज्ञानिक क्रांतियों की प्रारम्भिक खोजों से लेकर विनाशकारी परिणामों तक को शामिल किया गया है। लेखक ने जीव-विज्ञान, मानवशास्त्र, जीवाश्म विज्ञान और अर्थशास्त्र के गहन ज्ञान के आधार पर इस रहस्य का अन्वेषण किया है कि इतिहास के प्रवाह ने आख़िर कैसे हमारे मानव समाजों, हमारे चारों ओर के प्राणियों और पौधों को आकार दिया है। यही नहीं, इसने हमारे व्यक्तित्व को भी कैसे प्रभावित किया है।

    डॉ युवाल नोआ हरारी
    डॉ युवाल नोआ हरारी के पास ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी है और अब वे हिब्रू विश्वविद्यालय में विश्व इतिहास के विशेषज्ञ हैं। सेपियन्स : मानव जाति का एक संक्षिप्त इतिहास ने विश्व भर से प्रशंसक हासिल किये हैं, इन में बिल गेट्स, बराक ओबामा और जर्विस कॉकर जैसे नाम शामिल हैं। इसे अब तक 50 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित किया जा चुका है। यह संडे टाइम्स में नंबर एक बेस्टसेलर रही और पेपरबैक रूप में नौ महीने से अधिक के लिए शीर्ष दस में थी। ‘द गार्जियन’ द्वारा सेपियन्स को उत्कृष्ट, सबसे अधिक पढ़ने योग्य और इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण किताब के रूप में वर्णित किया गया है।
    प्राफेसर हरारी नियमित रूप से अपनी किताबों और लेखों में खोजे गए विषयों पर दुनिया भर में व्याख्यान देते हैं। वे गार्जियन, फाइनेंशियल टाइम्स, द टाइम्स, नेचर पत्रिका और वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे समाचार पत्रों के नियमित रूप से लेख भी लिखते हैं। वह स्वैच्छिक आधार पर विभिन्न संगठनों और दर्शकों को अपना ज्ञान और समय भी प्रदान करते हैं।

    Sapiens  Hindi – Manav Jati Ka Samkshipt Itihas

    डिलीवरी पर नकद / ऑनलाइन पेमेंट  उपलब्ध
    पृष्ठ 454   रु599

    599.00
  • धर्म और विश्वदृष्टि – पेरियार ई.वी. रामासामी

    199.00
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    धर्म और विश्वदृष्टि – पेरियार ई.वी. रामासामी

    धर्म और विश्वदृष्टि
    पेरियार ई.वी. रामासामी

    यह किताब ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितम्बर, 1879—24 दिसम्बर, 1973) के दार्शनिक व्यक्तित्व से परिचित कराती है। धर्म, ईश्वर और मानव समाज का भविष्य उनके दार्शनिक चिन्तन का केन्द्रीय पहलू रहा है। उन्होंने मानव समाज के सन्दर्भ में धर्म और ईश्वर की भूमिका पर गहन चिन्तन-मनन किया है। इस चिन्तन-मनन के निष्कर्षों को इस किताब के विविध लेखों में प्रस्तुत किया गया है। ये लेख पेरियार के दार्शनिक व्यक्तित्व के विविध आयामों को पाठकों के सामने रखते हैं। इनको पढ़ते हुए कोई भी सहज ही समझ सकता है कि पेरियार जैसे दार्शनिक-चिन्तक को महज़ नास्तिक कहना उनके गहन और बहुआयामी चिन्तन को नकारना है।

    यह किताब दो खंडों में विभाजित है। पहले हिस्से में समाहित वी. गीता और ब्रजरंजन मणि के लेख पेरियार के चिन्तन के विविध आयामों को पाठकों के सामने प्रस्तुत करते हैं। इसी खंड में पेरियार के ईश्वर और धर्म-सम्बन्धी मूल लेख भी समाहित हैं जो पेरियार की ईश्वर और धर्म-सम्बन्धी अवधारणा को स्पष्ट करते हैं।

    दूसरे खंड में पेरियार की विश्वदृष्टि से सम्बन्धित लेखों को संगृहीत किया गया है जिसमें उन्होंने दर्शन, वर्चस्ववादी साहित्य और भविष्य की दुनिया कैसी होगी जैसे सवालों पर विचार किया है। इन लेखों में पेरियार विस्तार से बताते हैं कि दर्शन क्या है और समाज में उसकी भूमिका क्या है? इस खंड में वह ऐतिहासिक लेख भी शामिल है जिसमें पेरियार ने विस्तार से विचार भी किया है कि भविष्य की दुनिया कैसी होगी?

    पृष्ठ-216 रु199

    199.00
  • Bhagat Singh Book - Hindi

    मैं नास्तिक क्याें हूँ – भगतसिंह

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    मैं नास्तिक क्याें हूँ – भगतसिंह

    मैं नास्तिक क्याें हूँ
    और ‘ड्रीमलैण्ड’ की भूमिका

     

    भगतसिंह

     

    ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ में भगतसिंह ने सृष्टि के विकास और गति की भौतिकवादी समझ पेश करते हुए उसके पीछे किसी मानवेतर ईश्वरीय सत्ता के अस्तित्व की परिकल्पना को वैज्ञानिक ढंग से निराधार सि( किया है। ‘ड्रीमलैण्ड की भूमिका’ में कृति की समीक्षा करते हुए भगतसिंह ने समाज-व्यवस्था, जीवन, क्रान्ति और भावी समाज के बारे में जो विचार प्रस्तुत किये हैं वे उनकी विकसित हो रही वैज्ञानिक भौतिकवादी दृष्टि का पता देते हैं। साथ ही इसमें उन्होंने अपने से पहले के क्रान्तिकारी आन्दोलन और उसकी विचारधारा की जो समीक्षा की है वह इस बात का स्पष्ट
    प्रमाण है कि पुराने क्रान्तिकारी मध्यमवर्गीय आतंकवाद के विचारों से नाता तोड़कर भगतसिंह आगे बढ़ चुके थे।

    आज भी नौजवानों में जो तरह-तरह के प्रतिगामी विचार, अवैज्ञानिक दृष्टिकोण, अन्धविश्वास, नियतिवाद आदि व्याप्त हैं, उन्हें देखते हुए भगतसिंह के ये दोनों लेख आज भी बहुत प्रासंगिक हैं। ये लेख हमें भारतीय मुक्तिसंघर्ष के इतिहास में क्रान्तिकारी आन्दोलन और भगतसिंह के बारे में नये सिरे से सोचने के लिए विवश तो करते ही हैं,
    क्रान्तिकारी वैज्ञानिक चिन्तन की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

    पृष्ठ 36   रु59

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  • 21 वीं सदी के लिए 21 सबक़

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    21 वीं सदी के लिए 21 सबक़

    21 वीं सदी के लिए 21 सबक़
    युवाल नोआ हरारी 

     

    सेपियन्स ने
    अतीत का विश्लेषण किया है

    होमो डेयस ने
    भविष्य का विश्लेषण किया है

    21 सबक़ ने
    वर्तमान का विश्लेषण किया है

    हम स्वयं को परमाणु युद्ध, परिस्थितिकीय विनाश और प्रौद्योगिकीय विध्वंस से कैसे बचा सकते हैं? झूठी ख़बरों की महामारी या आतंकवाद के खतरे के बारे में हम क्या कर सकते हैं ? हमें अपने बच्चों को क्या शिक्षा देनी चाहिए ?

    युवाल नोआ हरारी हमें वर्तमान के अति महत्वपूर्ण मुद्दों की रोमांचक यात्रा पर ले जाते हैं।
    निरन्तर भ्रम उत्पन्न करने वाले परिवर्तन के इस दौर में हम अपनी सामूहिक और वैक्तिक एकाग्रता को कैसे बरकरार रखें, यह चुनौती ही रोमांच और उमंग पैदा करने वाली इस नई पुस्तक का मूल बिंदु है। क्या हम अभी भी इस दुनिया को समझने में सक्षम हैं जो हमने रची हैं ?

     

    युवाल नोआ हरारी ने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएच डी की उपाधि प्राप्त की है और विश्व इतिहास में विशेज्ञता हासिल करने के बाद वे हिब्रू विश्वविद्यालय, यरूशलम में अध्यापन करते हैं। उनकी दो पुस्तकें ‘सेपियन्स: अ ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ ह्यूमनकाइंड’ और ‘होमो डेयस : अ ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ टुमारो’ अंतराष्ट्रीय स्टार पर चर्चित हो चुकी हैं।

    पृष्ठ 352   रु399

    399.00
  • होमो डेयस - आने वाले कल का संक्षिप्त इतिहास

    होमो डेयस – आने वाले कल का संक्षिप्त इतिहास

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    होमो डेयस – आने वाले कल का संक्षिप्त इतिहास

    युवाल नोआ हरारी

    बेस्टसेलिंग पुस्तक सेपियन्स: मन जाति का संक्षिप्त इतिहास के लेखक युवाल नोआ हरारी एक ऐसी दुनिया की कल्पना प्रस्तुत करते हैं जो बहुत ज़्यादा दूर नहीं है, और जिसमें हम सर्वथा नयी चुनौतियों का सामना करने वाले हैं।
    होमो डेयस उन परियोजनाओं, स्वप्नों और दुःस्वप्नो की पड़ताल करती है जो इक्कीसवीं सदी को आकार देने वाले हैं – मृत्यु पर विजय प्राप्त करने से लेकर कृत्रिम जीवन की रचना तक। यह किताब कुछ बुनियादी सवाल पूछती है: हम यहाँ से कहाँ जाएँगे? और हम अपनी ही विनाशकारी शक्तियों से इस नाज़ुक संसार की रक्षा कैसे करेंगे?

    सेपियन्स ने हमें बताया हम कहाँ से आये थे
    होमो डेयस हमें बताती है कि हम कहाँ जा रहे हैं

     

    डॉ. युवाल नोआ हरारी के पास ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी है और अब वे हिब्रू विश्वविद्यालय में विश्व इतिहास के विशेषज्ञ हैं। सेपियन्स : मानव जाति का एक संक्षिप्त इतिहास ने विश्व भर से प्रशंसक हासिल किये हैं, इन में बिल गेट्स, बराक ओबामा और जर्विस कॉकर जैसे नाम शामिल हैं। इसे अब तक 50 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित किया जा चुका है। यह संडे टाइम्स में नंबर एक बेस्टसेलर रही और पेपरबैक रूप में नौ महीने से अधिक के लिए शीर्ष दस में थी। ‘द गार्जियन’ द्वारा सेपियन्स को उत्कृष्ट, सबसे अधिक पढ़ने योग्य और इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण किताब के रूप में वर्णित किया गया है।
    प्राफेसर हरारी नियमित रूप से अपनी किताबों और लेखों में खोजे गए विषयों पर दुनिया भर में व्याख्यान देते हैं। वे गार्जियन, फाइनेंशियल टाइम्स, द टाइम्स, नेचर पत्रिका और वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे समाचार पत्रों के नियमित रूप से लेख भी लिखते हैं। वह स्वैच्छिक आधार पर विभिन्न संगठनों और दर्शकों को अपना ज्ञान और समय भी प्रदान करते हैं।

    पृष्ठ 428   रु450

    450.00
  • कैसा गुरु? कैसी मुक्ति?

    कैसा गुरु? कैसी मुक्ति?

    60.00
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    कैसा गुरु? कैसी मुक्ति?

    राजा राम हंडियाया

    तर्कशील सोसायटी हरियाणा के प्रधान श्री राजा राम हंडियाया की प्रथम पुस्तक ‘ परमात्मा कब कहां और कैसे ?” की सफल प्राप्ति के बाद यह दूसरी पुस्तक ” कैसा गुरू? कैसी मुक्ति ” भी अंधविश्वासों तथा धर्म, गुरू व मोक्ष की पुरातन व गैरवैज्ञानिक धारणाओं को खत्म करने व नई चेतना लाने में एक कारगर हथियार साबित होगी ।

    –  मेघ राज मित्र

    प्रधान तर्कशील सोसायटी भारत

    Tarksheel / Tarkshil 

    रु 60

    60.00
  • द लास्ट गर्ल - नादिया मुराद

    द लास्ट गर्ल – नादिया मुराद

    299.00
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    द लास्ट गर्ल – नादिया मुराद

     

    नादिया मुराद एक साहसी यज़ीदी युवती हैं जिन्होंने आईएसआईएस की कैद में रहते हुए यौन उत्पीड़न और अकल्पनीय दुख सहन किया है। नादिया के छह भाइयों की हत्या के बाद उनकी माँ को मार दिया गया और उनके शव कब्रिस्तान में दफ़ना दिए गए।

    परंतु नादिया ने हिम्मत नहीं हारी।

    यह संस्मरण, इराक में नादिया के शांतिपूर्ण बचपन से लेकर क्षति और निर्ममता, और फिर जर्मनी में उनके सुरक्षित लौटने तक का प्रेरणादायक सफ़र है। नादिया पर एलेक्ज़ैंड्रिया बॉम्बाख़ ने ऑन हर शोल्डर्स नामक फ़िल्म बनाई है, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है और वह संयुक्त राष्ट्र के डिग्निटी ऑफ़ सरवाइवर्स ऑफ़ ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग की पहली गुडविल एंबेसेडर भी हैं। इस किताब का सबसे बड़ा संदेश है : साहस और प्रमाण के साथ अपनी बात कहने से दुनिया को बदला जा सकता है।

    यह पुस्तक यज़ीदियों द्वारा सहन किए गए अत्याचार की सशक्त अभिव्यक्ति और उनके समुदाय की आध्यात्मिक संस्कृति की झलक प्रदान करती है… यह एक साहसी महिला द्वारा लिखी एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।

    -ईअन बिरेल, द टाइम्स

    एक साहसिक किताब… जो लोग तथाकथित इस्लामिक स्टेट के बारे में जानना चाहते हैं उन्हें यह पुस्तक पढ़नी चाहिए।

    – द इकोनॉमिस्ट

    नादिया मुराद मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्हें वक्लेव हैवेल मानवाधिकार पुरस्कार और सखारोव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह संयुक्त राष्ट्र के डिग्निटी ऑफ़़ सरवाइवर्स ऑफ़ ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग की पहली गुडविल एंबेसेडर भी हैं। वह यज़ीदियों की एक संस्था यज़दा के साथ मिलकर इस्लामिक स्टेट को नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराधों के कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सज़ा दिलावाने पर काम कर रही हैं। वह नादियाज़ इनिशिएटिव नाम का एक कार्यक्रम भी चलाती हैं, जो नरसंहार और गु़लामी से पीड़ित रह चुके लोगों के कल्याण और उनके समुदाय को पुनर्स्थापित करने की दिशा में काम करता है।

    जेना क्राजेस्की, न्यू यॉर्क की एक पत्रकार हैं। तुक, मिस्र, इराक और सीरिया में उनके द्वारा किया काम न्यू यॉर्कर, स्लेट, द नेशन, वर्जीर्निया क्वाटर्ली रिव्यू और अन्य जगहों पर छपा है और ऑनलाइन भी प्रकाशित हुआ है। जेना, 2016 में मिशिगन यूनिवर्सिटी की नाइट-वॉलेस फे़लो भी रह चुकी हैं।

    पृष्ठ 264 + 08 कलर फोटो पेजेज   रु299

    299.00
  • भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़ – चमन लाल

    399.00
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    भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़ – चमन लाल

    भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़
    चमन लाल

    शहीद भगत सिंह ने कहा था : ‘क्रान्ति की तलवार विचारों की सान पर तेज़ होती है’ और यह भी कि ‘क्रान्ति ईश्वर-विरोधी हो सकती है, मनुष्य-विरोधी नहीं’। ध्यान से देखा जाए तो ये दोनों ही बातें भगत सिंह के महान क्रान्तिकारी व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। लेकिन इस सन्दर्भ में महत्त्वपूर्ण यह है कि भगत सिंह की विचारधारा और उनकी क्रान्तिकारिता के ज्वलन्त प्रमाण जिन लेखों और दस्तावेज़ों में दर्ज हैं, वे आज भी पूर्ववत् प्रासंगिक हैं, क्योंकि ‘इस’ आज़ादी के बाद भी भारतीय समाज ‘उस’ आज़ादी से वंचित है, जिसके लिए उन्होंने और उनके असंख्य साथियों ने बलिदान दिया था। दूसरे शब्दों में, भगत सिंह के क्रान्तिकारी विचार उन्हीं के साथ समाप्त नहीं हो गए, क्योंकि व्यक्ति की तरह किसी विचार को कभी फाँसी नहीं दी जा सकती। कहने की आवश्यकता नहीं कि यह पुस्तक भगत सिंह की इसी विचारधारात्मक भूमिका को समग्रता के साथ हमारे सामने रखती है। वस्तुत: हिन्दी में पहली बार प्रकाशित यह कृति भगत सिंह के भावनाशील विचारों, विचारोत्तेजक लेखों, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों, वक्तव्यों तथा उनके साथियों और पूर्ववर्ती शहीदों की क़लम से निकले महत्त्वपूर्ण विचारों की ऐसी प्रस्तुति है जो वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक स्थितियों की बुनियादी पड़ताल करने में हमारी दूर तक मदद करती है।

    पृष्ठ 380 रु399

    399.00
  • शहीद भगत सिंह : क्रान्ति का साक्ष्य – सुधीर विद्यार्थी

    295.00
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    शहीद भगत सिंह : क्रान्ति का साक्ष्य – सुधीर विद्यार्थी

    शहीद भगत सिंह : क्रान्ति का साक्ष्य
    सुधीर विद्यार्थी

    विगत कुछ वर्षों से शहीदे–आज़म भगतसिंह के बुत को अपनी–अपनी तरह तराशने की कोशिशें इतिहास, राजनीति और संस्कृति की दुनिया में हमें दिखाई पड़ीं। बुद्धिजीवियों और प्रगतिशीलों के मध्य भगतसिंह विमर्श का मुद्दा बने रहे। उनके अदालती बयान, आलेख, पत्र, निबन्ध, जेल नोटबुक उन्हें एक सचेत बौद्धिक क्रान्तिकारी बनाते हैं। वहीं दूसरी ओर उनका बेहद सक्रिय क्रान्तिकारी जीवन जिसकी शुरुआत उन्होंने 1925–26 से की थी और जिसका अन्त 23 मार्च, 1931 को लाहौर जेल में उनकी फाँसी से हुआ। अर्थात् कुल मिलाकर लगभग छह–सात वर्षों की तूफ़ानी ज़िन्दगी जहाँ वे काकोरी केस के रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसीघर से छुड़ाने की ख़तरनाक योजना में अपनी प्रारम्भिक जद्दोजेहद करते दिखाई देते हैं। तब ‘बलवन्त सिंह’ नाम से उनकी इब्तदाई गतिविधियाँ जैसे भविष्य के गम्भीर क्रान्तिधर्मी की रिहर्सलें थीं। काकोरी की फाँसियों (1927) के पश्चात् भगतसिंह विचार की दुनिया में अद्भुत छलाँग लगाते हैं—अपने पूर्ववर्ती क्रान्तिकारी आन्दोलन को बहुत पीछे छोड़ते हुए।

    भगतसिंह के समस्त दस्तावेज़ों, अदालती बयानों, पत्रों, रेखाचित्रों, निबन्धों, जेल नोटबुक और उनके मूल्यांकन सम्बन्धी अभिलेखीय साक्ष्यों के बीच उनके साथियों के लिखे संस्मरणों की यह प्रथम कृति भगतसिंह से प्यार करनेवाले लोगों के हाथों में सौंपते हुए मुझे निश्चय ही बड़ी प्रसन्नता है। इन दुर्लभ स्मृतियों को सामने रखकर वे भगतसिंह के जीवन और उस युग के क्रान्तिकारी घटनाक्रम की एक स्पष्ट छवि निर्मित करने के साथ ही अपने समय के सवालों से टकराने के लिए आगे की अपनी क्रान्तिकारी भूमिका की भी खोजबीन कर सकेंगे, ऐसी आशा है।

    पृष्ठ 344 रु295

    295.00
  • सच्ची रामायण - पेरियार ई.वी. रामासामी

    सच्ची रामायण – पेरियार ई.वी. रामासामी

    175.00
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    सच्ची रामायण – पेरियार ई.वी. रामासामी

    सच्ची रामायण
    पेरियार ई.वी. रामासामी

    ‘सच्ची रामायण’ ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ की बहुचर्चित और सबसे विवादास्पद कृति रही है। पेरियार रामायण को एक राजनीतिक ग्रन्थ मानते थे। उनका कहना था कि इसे दक्षिणवासी अनार्यों पर उत्तर के आर्यों की विजय और प्रभुत्व को जायज़ ठहराने के लिए लिखा गया और यह ग़ैर-ब्राह्मणों पर ब्राह्मणों और महिलाओं पर पुरुषों के वर्चस्व का उपकरण है।

    ‘रामायण’ की मूल अन्तर्वस्तु को उजागर करने के लिए पेरियार ने ‘वाल्मीकि रामायण’ के अनुवादों सहित; अन्य राम कथाओं, जैसे—’कंब रामायण’, ‘तुलसीदास की रामायण’ (रामचरितमानस), ‘बौद्ध रामायण’, ‘जैन रामायण’ आदि के अनुवादों तथा उनसे सम्बन्धित ग्रन्थों का चालीस वर्षों तक अध्ययन किया और ‘रामायण पादीरंगल’ (रामायण के पात्र) में उसका निचोड़ प्रस्तुत किया। यह पुस्तक 1944 में तमिल भाषा में प्रकाशित हुई। इसका अंग्रेज़ी अनुवाद ‘द रामायण : अ ट्रू रीडिंग’ नाम से 1959 में प्रकाशित हुआ।

    यह किताब हिन्दी में 1968 में ‘सच्ची रामायण’ नाम से प्रकाशित हुई थी, जिसके प्रकाशक लोकप्रिय बहुजन कार्यकर्ता ललई सिंह थे। 9 दिसम्बर, 1969 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया और पुस्तक की सभी प्रतियों को ज़ब्त कर लिया। ललई सिंह यादव ने इस प्रतिबन्ध और ज़ब्ती को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। वे हाईकोर्ट में मुक़दमा जीत गए। सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 16 सितम्बर, 1976 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सर्वसम्मति से फ़ैसला देते हुए राज्य सरकार की अपील को ख़ारिज कर दिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में निर्णय सुनाया।

    प्रस्तुत किताब में ‘द रामायण : अ ट्रू रीडिंग’ का नया, सटीक, सुपाठ्य और अविकल हिन्दी अनुवाद दिया गया है। साथ ही इसमें ‘सच्ची रामायण’ पर केन्द्रित लेख व पेरियार का जीवनचरित भी दिया गया है, जिससे इसकी महत्ता बहुत बढ़ गई है। यह भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक आन्दोलन के इतिहास को समझने के इच्छुक हर व्यक्ति के लिए एक आवश्यक पुस्तक है।

    पृष्ठ-152 रु175

    175.00
  • जाति व्यवस्था और पितृसत्ता – पेरियार ई.वी. रामासामी

    175.00
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    जाति व्यवस्था और पितृसत्ता – पेरियार ई.वी. रामासामी

    जाति व्यवस्था और पितृसत्ता
    पेरियार ई.वी. रामासामी

    ‘जाति और पितृसत्ता’ ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ के चिन्तन, लेखन और संघर्षों की केन्द्रीय धुरी रही है। उनकी दृढ़ मान्यता थी कि इन दोनों के विनाश के बिना किसी आधुनिक समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता है। जाति और पितृसत्ता के सम्बन्ध में पेरियार क्या सोचते थे और क्यों वे इसके विनाश को आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य एवं अनिवार्य मानते थे? इन प्रश्नों का हिन्दी में एक मुकम्मल जवाब पहली बार यह किताब देती है।

    इस संग्रह के लेख पाठकों को न केवल पेरियार के नज़रिए से बख़ूबी परिचित कराते हैं बल्कि इसकी भी झलक प्रस्तुत करते हैं कि पेरियार जाति एवं पितृसत्ता के विनाश के बाद किस तरह के सामाजिक सम्बन्धों की कल्पना करते थे। इन लेखों को पढ़ते हुए स्त्री-पुरुष के बीच कैसे रिश्ते होने चाहिए, इसकी एक पूरी तस्वीर सामने आ जाती है। इस किताब के परिशिष्ट खंड में पेरियार के सम्पूर्ण जीवन का वर्षवार लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। पेरियार क़रीब 94 वर्षों तक जीवित रहे और अनवरत अन्याय के सभी रूपों के ख़िलाफ़ संघर्ष करते रहे। इस दौरान उन्होंने जो कुछ लिखा-कहा, उसमें से उनके कुछ प्रमुख उद्धरणों का चयन भी परिशिष्ट खंड में है। यही नहीं, इस खंड में तीन लेख पेरियार के अध्येताओं द्वारा लिखे गए हैं। पहले लेख में प्रसिद्ध विदुषी ललिता धारा ने महिलाओं के सन्दर्भ में पेरियार के चिन्तन, लेखन और संघर्षों के विविध आयामों को प्रस्तुत किया है। दूसरा और तीसरा लेख पेरियार के सामाजिक सघर्षों का एक गहन और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इनके लेखक टी. थमराईकन्न और वी. गीता तथा एस.वी. राजादुरै हैं। ये तीनों लेखक पेरियार के गम्भीर अध्येता माने जाते हैं। किताब का यह अन्तिम हिस्सा उनके चिन्तन, लेखन और संघर्षों के विविध चरणों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

    पृष्ठ-150 रु175

    175.00
  • भगत सिंह - 1 - पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान

    भगत सिंह – 1 – पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान

    170.00
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    भगत सिंह – 1 – पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH : KHAND-1
    PATR, TAAR, PARCHE OR ADALATI BAYAN

    पृष्ठ 168  रु170

    170.00
  • भगत सिंह - 2 - लेख

    भगत सिंह – 2 – लेख

    165.00
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    भगत सिंह – 2 – लेख

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH LEKH : KHAND-2

    पृष्ठ 164  रु165

    165.00
  • भगत सिंह - 3 - क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    भगत सिंह – 3 – क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

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    भगत सिंह – 3 – क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH KRANTIKARIYO KE REKHACHITRA : KHAND-3

    पृष्ठ 146  रु150

    150.00
  • भगत सिंह - 4 - जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    भगत सिंह – 4 – जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

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    भगत सिंह – 4 – जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH JAIL NOTEBOOK AUR DON BRIN KI ATMKATHA KA ANUVAD : KHAND-4

    पृष्ठ 222  रु200

    200.00
  • सिक्स भाईयों से कृछ बातें

    सिक्स भाईयों से कृछ बातें

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    सिक्स भाईयों से कृछ बातें

    मक्खन सिंह जौहल

    मक्खन सिंह जौहल लेखक नहीं है और न ही उसने कभी लेखक होने का दावा किया है। वह मार्क्सवादी विचारधारा को मानने वाला सियासी व्यक्ति है। शब्द चीज़ है । इसलिए इसके स्थान पर हमें ‘ राजनैतिक व्यक्ति वाक्य का उपयोग करना पडेगा। मार्क्सवादी फलसफा और विधि-विज्ञान प्रारंभ से ही उसकी रग-रग में समाया हुआ है। क्योंकि यह विद्या उसे विरासत में मिली है। कामरेड बूझा सिंह जी उसके नाना जो थे। इस पुस्तक में शामिल सभी निबंध विदेशों के पंजाबी अखबारों में प्रकाशित हो चुके हैं । इन निबंधों का अध्यन करने पर यह स्वत: ही स्पष्ट हो जाएगा कि साथी मक्खन सिंह जौहल ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हल्कों में घटने वाली राजनैतिक घटनाओं का चेतन्य तौर पर नोटिस लिया है| उनके बारे में टिप्पणियां की हैं, उनका विशलेषण और मूल्यांकन किया है तथा भविष्य के बारे में अपने अनुमान और परिकल्पनाएं पेश की हैं |

    ऐतिहासिक पदार्थवादी उसका रास्ता है और द्वंद उसका विधि-विज्ञान । कठिन विषयों को उसने बहुत ही सरल भाषा में हमें समझाने का प्रयास किया है । उसका मकसद, आम लोगों को इन घटनाओं की जानकारी देते हुए उन्हें तथ्यों से आगाह करने के साथ-साथ इनके अच्छे-बुरे पक्षों से सचेत करना भी था। अपनी जमाती लड़ाई लड़ने का उसका यह अपना ढंग है । उसने जमाती संघर्ष का हथियार अपनी कलम को बनाया है। वह सिर्फ कलमी सिपाही ही नहीं है अपुति इंगलैंड में चल रहे जमाती-संघर्ष में तन, मन और धन से शामिल भी है । आम आदमी की विशेष के साथ हो रही लड़ाई से लेकर उसकी लड़ाई पूँजीवाद और साम्राज्यवाद के प्रतिदिन बदल रहे घिनौने रूपों के खिलाफ चलती है । वह राजनैतिक लेखक है, उसे कलम के स्वर के बारे में पता है । उसके इस प्रयास का मैं स्वागत करता हूँ ।

    स्वरन चंदन (डा.)

     

    रु 40

    40.00
  • तर्कशील जादुगर

    तर्कशील जादुगर

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    तर्कशील जादुगर

    सरजीत तलवार

     

    तर्कशील भारती प्रकाशन

    Tarkshil Jaadugar

    रु 50

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  • मानवता का वध

    मानवता का वध

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    मानवता का वध

    आर पी गांधी

     

    लेखक आर. पी. गान्धी अपनी पुस्तक “मानवता का वध’ की मूल को लिखवाते हुए।  साथ में श्री शिवदयाल सिंह मूल प्रति लिखते हुए।

    1. श्री आर. पी. गान्धी द्वारा चावलों से भरा लोटा चाकुद्वारा उठाया जाना।
    2. डा. इन्द्रजीत कमल जिह्वा में सें त्रिशूल निकालते हुए।
    3. डा. इन्द्रजीत कमल एक फूल से एक बहुत बड़ा गुलदस्ता बनाते हुए।

    Tarksheel / Tarkshil 

    रु 60

    60.00