स्वतंत्र विचार

Showing all 15 results

Show Grid/List of >5/50/All>>
  • सेपियन्स - मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास

    सेपियन्स – मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास

    599.00
    Add to cart

    सेपियन्स – मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास

    डॉ युवाल नोआ हरारी

    डॉ. युवाल नोआ हरारी द्वारा लिखित किताब ‘सेपियन्स’ में मानव जाति के संपूर्ण इतिहास को अनूठे परिप्रेक्ष्य में अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्तुतिकरण अपने आप में अद्वितीय है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक मानव जाति के विकास की यात्रा के रोचक तथ्यों को लेखक ने शोध पर आधारित आँकडों के साथ इस तरह शब्दों में पिरोया है कि यह किताब निश्चित रूप से मॉर्डन क्लासिक किताबों की श्रेणी में शुमार होगी।

    करीब 100,000 साल पहले धरती पर मानव की कम से कम छह प्रजातियाँ बसती थीं, लेकिन आज स़िर्फ हम (होमो सेपियन्स) हैं। प्रभुत्व की इस जंग में आख़िर हमारी प्रजाति ने कैसे जीत हासिल की? हमारे भोजन खोजी पूर्वज शहरों और साम्राज्यों की स्थापना के लिए क्यों एकजुट हुए? कैसे हम ईश्वर, राष्ट्रों और मानवाधिकारों में विश्वास करने लगे? कैसे हम दौलत, किताबों और कानून में भरोसा करने लगे? और कैसे हम नौकरशाही, समय-सारणी और उपभोक्तावाद के गुलाम बन गए? आने वाले हज़ार वर्षों में हमारी दुनिया कैसी होगी? इस किताब में इन्हीं रोचक सवालों के जवाब समाहित हैं।

    ‘सेपियन्स’ में डॉ. युवाल नोआ हरारी ने मानव जाति के रहस्यों से भरे इतिहास का विस्तार से वर्णन किया है। इसमें धरती पर विचरण करने वाले पहले इंसानों से लेकर संज्ञानात्मक, कृषि और वैज्ञानिक क्रांतियों की प्रारम्भिक खोजों से लेकर विनाशकारी परिणामों तक को शामिल किया गया है। लेखक ने जीव-विज्ञान, मानवशास्त्र, जीवाश्म विज्ञान और अर्थशास्त्र के गहन ज्ञान के आधार पर इस रहस्य का अन्वेषण किया है कि इतिहास के प्रवाह ने आख़िर कैसे हमारे मानव समाजों, हमारे चारों ओर के प्राणियों और पौधों को आकार दिया है। यही नहीं, इसने हमारे व्यक्तित्व को भी कैसे प्रभावित किया है।

    डॉ युवाल नोआ हरारी
    डॉ युवाल नोआ हरारी के पास ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी है और अब वे हिब्रू विश्वविद्यालय में विश्व इतिहास के विशेषज्ञ हैं। सेपियन्स : मानव जाति का एक संक्षिप्त इतिहास ने विश्व भर से प्रशंसक हासिल किये हैं, इन में बिल गेट्स, बराक ओबामा और जर्विस कॉकर जैसे नाम शामिल हैं। इसे अब तक 50 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित किया जा चुका है। यह संडे टाइम्स में नंबर एक बेस्टसेलर रही और पेपरबैक रूप में नौ महीने से अधिक के लिए शीर्ष दस में थी। ‘द गार्जियन’ द्वारा सेपियन्स को उत्कृष्ट, सबसे अधिक पढ़ने योग्य और इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण किताब के रूप में वर्णित किया गया है।
    प्राफेसर हरारी नियमित रूप से अपनी किताबों और लेखों में खोजे गए विषयों पर दुनिया भर में व्याख्यान देते हैं। वे गार्जियन, फाइनेंशियल टाइम्स, द टाइम्स, नेचर पत्रिका और वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे समाचार पत्रों के नियमित रूप से लेख भी लिखते हैं। वह स्वैच्छिक आधार पर विभिन्न संगठनों और दर्शकों को अपना ज्ञान और समय भी प्रदान करते हैं।

    Sapiens  Hindi – Manav Jati Ka Samkshipt Itihas

    डिलीवरी पर नकद / ऑनलाइन पेमेंट  उपलब्ध
    पृष्ठ 454   रु599

    599.00
  • जातिप्रथा उन्मूलन और अन्य निबंध - बाबासाहेब अम्बेडकर

    जातिप्रथा उन्मूलन और अन्य निबंध – बाबासाहेब अम्बेडकर

    640.00
    Add to cart

    जातिप्रथा उन्मूलन और अन्य निबंध – बाबासाहेब अम्बेडकर

    जातिप्रथा उन्मूलन और अन्य निबंध
    बाबासाहेब अम्बेडकर

    कई किताबें है जाति व्यवस्था पे और हम इसे कैसे खत्म कर सकते हैं, इससे संबंधित हैं। लेकिन डॉ अम्बेडकर द्वारा लिखित “जातिप्रथा उन्मूलन” (Annihilation of Caste) आज तक के इस विषय पर सभी पुस्तकों सबसे उत्कृष्ट है। क्योंकि यह व्यवस्थित रूप से दिखाता है कि यह कैसे काम करता है, लोगों को उनका शोषण और अधीन में रखने के लिए के लिए जातियों में जातिप्रथा करते है।  वह हमें स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि सदियों से दुर्व्यवहार और शोषण के शिकार लोगों को मुक्त करने के लिए जाति व्यवस्था को अंत करना होगा।

    यह पुस्तक जाति व्यवस्था और अन्य प्रासंगिक विषयों पर अम्बेडकर के लेखन का एक श्रेष्ठ संग्रह है। जाति-मुक्त भारत के पक्ष में खड़े हर भारतीय को इसे पढ़ना चाहिए, क्योंकि यह बहुत सारी समझ और उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

    Destruction of Caste System  / Jatipradha Unmulan

    पृष्ठ 592   रु640

    640.00
  • Bhagat Singh Book - Hindi

    मैं नास्तिक क्याें हूँ – भगतसिंह

    59.00
    Add to cart

    मैं नास्तिक क्याें हूँ – भगतसिंह

    मैं नास्तिक क्याें हूँ
    और ‘ड्रीमलैण्ड’ की भूमिका

     

    भगतसिंह

     

    ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ में भगतसिंह ने सृष्टि के विकास और गति की भौतिकवादी समझ पेश करते हुए उसके पीछे किसी मानवेतर ईश्वरीय सत्ता के अस्तित्व की परिकल्पना को वैज्ञानिक ढंग से निराधार सि( किया है। ‘ड्रीमलैण्ड की भूमिका’ में कृति की समीक्षा करते हुए भगतसिंह ने समाज-व्यवस्था, जीवन, क्रान्ति और भावी समाज के बारे में जो विचार प्रस्तुत किये हैं वे उनकी विकसित हो रही वैज्ञानिक भौतिकवादी दृष्टि का पता देते हैं। साथ ही इसमें उन्होंने अपने से पहले के क्रान्तिकारी आन्दोलन और उसकी विचारधारा की जो समीक्षा की है वह इस बात का स्पष्ट
    प्रमाण है कि पुराने क्रान्तिकारी मध्यमवर्गीय आतंकवाद के विचारों से नाता तोड़कर भगतसिंह आगे बढ़ चुके थे।

    आज भी नौजवानों में जो तरह-तरह के प्रतिगामी विचार, अवैज्ञानिक दृष्टिकोण, अन्धविश्वास, नियतिवाद आदि व्याप्त हैं, उन्हें देखते हुए भगतसिंह के ये दोनों लेख आज भी बहुत प्रासंगिक हैं। ये लेख हमें भारतीय मुक्तिसंघर्ष के इतिहास में क्रान्तिकारी आन्दोलन और भगतसिंह के बारे में नये सिरे से सोचने के लिए विवश तो करते ही हैं,
    क्रान्तिकारी वैज्ञानिक चिन्तन की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

    पृष्ठ 36   रु59

    59.00
  • आरंभिक भारतीय

    आरंभिक भारतीय

    350.00
    Add to cart

    आरंभिक भारतीय

    टोनी जोसेफ़

    हम भारतीय कौन हैं?
    हम कहाँ से आए थे?

    इन गहन सवालों के जवाबों को जानने के लिए पत्रकार टोनी जोसेफ़ 65,000 वर्ष अतीत में जाते हैं, जब आधुनिक मानवों या होमो सेपियन्स के एक समूह ने सबसे पहले अफ़्रीका से भारतीय उपमहाद्धीप तक का सफ़र तय किया था। हाल के डीएनए प्रमाणों का हवाला देते हुए वे भारत में आधुनिक मानवों के बड़े पैमाने पर हुए आगमन यानी ईरान से 7000 ईसा पूर्व और 3000 ईसा पूर्व के बीच कृषकों के आगमन तथा 2000 ईसा पूर्व और 1000 ईसा पूर्व के बीच मध्य एशियाई स्टेपी (घास के मैदान) से अन्य लोगों के साथ ही पशुपालकों के आगमन का भी पता लगाते हैं।
    आनुवांशिक विज्ञान और अन्य अनुसंधानों के परिणामों का उपयोग करते हुए जोसेफ़ जब हमारे इतिहास की परतों का ख़ुलासा करते हैं, तब उनका सामना भारत के इतिहास के कुछ सबसे विवादास्पद और असहज सवालों से होता है :

    • हड़प्पा के लोग कौन थे?
    • क्या आर्यों का भारत में वास्तव में आगमन हुआ था?
    • क्या उत्तर भारतीय आनुवांशिक रूप से दक्षिण भारतीयों से भिन्न हैं?

    यह एक बेहद महत्त्वपूर्ण पुस्तक है, जो प्रामाणिक और साहसी तरीक़े से आधुनिक भारत की वंशावली से जुड़ी चर्चाओं पर विराम लगाती है। यह पुस्तक न केवल हमें यह दिखाती है कि आधुनिक भारत की जनसंख्या के वर्तमान स्वरूप की रचना कैसे हुई, बल्कि इस बारे में भी निर्विवाद और महत्वपूर्ण सत्य का ख़ुलासा करती है कि हम कौन हैं।

    हम सब बाहर से आकर बसे हैं
    और हम सब मिश्रित जाति के हैं

    टोनी जोसेफ़
    बिज़नेसवर्ल्ड के पूर्व संपादक टोनी जोसेफ़ अनेक शीर्ष अख़बारों और पत्रिकाओं में कॉलम लिखते रहे हैं। उन्होंने हिंदुस्तान के प्रागितिहास पर भी अनेक प्रभावशाली लेख लिखे हैं।


    AWARDS Received for this book:

    • Best non-fiction books of the decade (2010-2019) – The Hindu.
    • Book of the Year Award (non-fiction), Tata Literature Live, 2019 – The Wire.
    • Shakti Bhatt First Book Prize 2019 – The Indian Express.
    • Atta Galatta Award for best Non-Fiction, 2019 – Deccan Herald.
    • One of the 10 Best New Prehistory Books To Read In 2020, as identified by Book Authority.

    पृष्ठ 226   रु350

    350.00
  • ब्रह्मांड के बड़े सवालों के संक्षिप्त जवाब

    ब्रह्मांड के बड़े सवालों के संक्षिप्त जवाब

    350.00
    Add to cart

    ब्रह्मांड के बड़े सवालों के संक्षिप्त जवाब

    स्टीफ़न हॉकिंग 

    दुनिया के प्रसिद्ध ब्रह्मांड विज्ञानी और अ ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम के लेखक के ब्रह्मांड के सबसे बड़े प्रश्नों पर व्यक्त अंतिम विचार उनकी इस मरणोपरांत प्रकाशित पुस्तक में दिए गए हैं।

    ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई? क्या मानवता पृथ्वी पर अस्तित्व में रहेगी? क्या सौर मंडल से भी ज्यादा बौद्धिक जीवन कोई है? क्या आर्टिफ़िशल इंटेलिजेंस हमें नियंत्रित करेगा?

    अपने असाधारण करिअर में स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड के प्रति हमारी समझ को और अधिक विस्तार दिया है तथा कई रहस्यों को उजागर किया है। लेकिन फिर भी ब्लैक होल्स, काल्पनिक समय और विभिन्न इतिहास-काल पर उनका सैद्धान्तिक कार्य उनकी सोच को अंतरिक्ष के गूढ़तम स्तर तक ले जाता है। हॉकिंग मानते थे कि पृथ्वी पर जो भी समस्याएं हैं, उनको हल करने में विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    अब हम इन विनाशकारी बदलावों का सामना कर रहे हैं – जैसे पर्यावरण में बदलाव, परमाणु युद्ध की चुनौती और आर्टिफ़िशल सुपर इंटेलिजेंस का विकास। स्टीफ़न हॉकिंग सबसे अहम और मानवता के लिए अति महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात कह रहे हैं।

    मानव के रूप में हम जो चुनौती अपने समक्ष पाते हैं और ये पृथ्वी किस दिशा में बढ़ रही है, उस बारे में लेखक के निजी विचार इस पुस्तक में दिए गए हैं।

    स्टीफ़न हॉकिंग एक उत्कृष्ट सैद्धांतिक भौतिकविद और दुनिया के सबसे महान विचारकों में से एक माने जाते थे। वे तीस वर्षों तक केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफ़ेसर रहे और साथ ही वे दुनिया की बेस्टसेलर पुस्तक ‘अ ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’ के लेखक भी हैं।
    सामान्य पाठकों के लिए उनकी अन्य पुस्तकों में शामिल हैं ‘अ ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’, निबंध संकलन ‘ब्लैक होल्स एंड बेबी यूनिवर्सिस’, ‘द युनिवर्स इन अ नटशेल’, ‘द ग्रैंड डिज़ाइन’ और ‘ब्लैक होल्स : द बीबीसी राइथ लैक्चर्स’।

    उन्होंने अपनी बेटी लूसी हॉकिंग के साथ बच्चों की पुस्तकें भी लिखी हैं, जिनमें पहली पुस्तक थी ‘जॉर्जिस सीक्रेट की टु द यूनिवर्स’ । 14 मार्च 2018 को उनका देहांत हो गया।

    डिलीवरी पर नकद / ऑनलाइन पेमेंट  उपलब्ध
    पृष्ठ 212   रु350

    350.00
  • कैसा गुरु? कैसी मुक्ति?

    कैसा गुरु? कैसी मुक्ति?

    60.00
    Add to cart

    कैसा गुरु? कैसी मुक्ति?

    राजा राम हंडियाया

    तर्कशील सोसायटी हरियाणा के प्रधान श्री राजा राम हंडियाया की प्रथम पुस्तक ‘ परमात्मा कब कहां और कैसे ?” की सफल प्राप्ति के बाद यह दूसरी पुस्तक ” कैसा गुरू? कैसी मुक्ति ” भी अंधविश्वासों तथा धर्म, गुरू व मोक्ष की पुरातन व गैरवैज्ञानिक धारणाओं को खत्म करने व नई चेतना लाने में एक कारगर हथियार साबित होगी ।

    –  मेघ राज मित्र

    प्रधान तर्कशील सोसायटी भारत

    Tarksheel / Tarkshil 

    रु 60

    60.00
  • इकिगाई

    इकिगाई

    350.00
    Add to cart

    इकिगाई

    लम्बे और खुशहाल जीवन
    का जापानी रहस्य
    हेक्टर गार्सिया और फ़्रान्सेस्क मिरालेस

    इकिगाई के बारे में अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलिंग गाइड से जानें
    दीर्घायु होने और खुशहाल जीवन जीने का जापानी रहस्य

    जापान के लोग विश्वास करते हैं कि इकिगाई हर एक के भीतर छिपा होता है – यह हर सुबह नींद से जागने की वजह होती है। प्रेरणा और सांत्वना देने वाली यह पुस्तक आपको अपना व्यक्तिगत इकिगाई खोजने में मदद के लिए जीवन में परिवर्तन लाने वाले साधन उपलब्ध कराएगी। यह आपको दिखलाएगी कि कैसे अनावश्यक भार को पीछे छोड़कर अपना उद्देश्य हासिल किया जाए, मित्रता को विकसित किया जाए और स्वंय को अपने जुनून के लिए समर्पित किया जाए।

     

    लेखक के बारे में

    हेक्टर गार्सिया जापान के नागरिक हैं, जहाँ कि वह एक दशक से अधिक समय से रह रहे हैं। वह स्पेन के भी नागरिक हैं, जहाँ कि उनका जन्म हुआ था। वह जापानी संस्कृति के बारे में कर्इ पुस्तकों के लेखक हैं जिनमें से दो पुस्तकें – अ गीक इन जापान और इकिगार्इ दुनिया की बेस्टसेलर्स में शुमार हैं। पूर्व में सॉफ़्टवेयर इंजीनियर रहे हेक्टर जापान में बसने से पहले स्विट्ज़रलैंड के सी र्इ आर एन में काम कर चुके हैं।

    फ़्रान्सेस्क मिरालेस बेहतर जीवन कैसे जिएँ विषय पर पुरस्कार प्राप्त अंतरराष्ट्रीय बेस्ट सेलर किताबों के लेखक हैं। साथ ही उन्होंने लव इन स्मॉल लेटर्स और वाबी-साबी उपन्यास भी लिखे हैं। हेक्टर गार्सिया के साथ उनका जापान के ओकिनावा में स्वागत किया गया, जहाँ के निवासी दुनिया की किसी भी अन्य जगह से ज़्यादा लम्बा जीवन जीते हैं। वहाँ उन्हें सौ भी अधिक ग्रामीणों से उनकी लंबी और ख़ुशहाल ज़िंदगी के दर्शन के बारे में साक्षात्कार करने का मौक़ा मिला।

    Ikkigai / Ikigayi

    डीलक्स हार्ड बाउंड एडिशन
    पृष्ठ 194   रु350

    350.00
  • द लास्ट गर्ल - नादिया मुराद

    द लास्ट गर्ल – नादिया मुराद

    299.00
    Add to cart

    द लास्ट गर्ल – नादिया मुराद

     

    नादिया मुराद एक साहसी यज़ीदी युवती हैं जिन्होंने आईएसआईएस की कैद में रहते हुए यौन उत्पीड़न और अकल्पनीय दुख सहन किया है। नादिया के छह भाइयों की हत्या के बाद उनकी माँ को मार दिया गया और उनके शव कब्रिस्तान में दफ़ना दिए गए।

    परंतु नादिया ने हिम्मत नहीं हारी।

    यह संस्मरण, इराक में नादिया के शांतिपूर्ण बचपन से लेकर क्षति और निर्ममता, और फिर जर्मनी में उनके सुरक्षित लौटने तक का प्रेरणादायक सफ़र है। नादिया पर एलेक्ज़ैंड्रिया बॉम्बाख़ ने ऑन हर शोल्डर्स नामक फ़िल्म बनाई है, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है और वह संयुक्त राष्ट्र के डिग्निटी ऑफ़ सरवाइवर्स ऑफ़ ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग की पहली गुडविल एंबेसेडर भी हैं। इस किताब का सबसे बड़ा संदेश है : साहस और प्रमाण के साथ अपनी बात कहने से दुनिया को बदला जा सकता है।

    यह पुस्तक यज़ीदियों द्वारा सहन किए गए अत्याचार की सशक्त अभिव्यक्ति और उनके समुदाय की आध्यात्मिक संस्कृति की झलक प्रदान करती है… यह एक साहसी महिला द्वारा लिखी एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।

    -ईअन बिरेल, द टाइम्स

    एक साहसिक किताब… जो लोग तथाकथित इस्लामिक स्टेट के बारे में जानना चाहते हैं उन्हें यह पुस्तक पढ़नी चाहिए।

    – द इकोनॉमिस्ट

    नादिया मुराद मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्हें वक्लेव हैवेल मानवाधिकार पुरस्कार और सखारोव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह संयुक्त राष्ट्र के डिग्निटी ऑफ़़ सरवाइवर्स ऑफ़ ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग की पहली गुडविल एंबेसेडर भी हैं। वह यज़ीदियों की एक संस्था यज़दा के साथ मिलकर इस्लामिक स्टेट को नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराधों के कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सज़ा दिलावाने पर काम कर रही हैं। वह नादियाज़ इनिशिएटिव नाम का एक कार्यक्रम भी चलाती हैं, जो नरसंहार और गु़लामी से पीड़ित रह चुके लोगों के कल्याण और उनके समुदाय को पुनर्स्थापित करने की दिशा में काम करता है।

    जेना क्राजेस्की, न्यू यॉर्क की एक पत्रकार हैं। तुक, मिस्र, इराक और सीरिया में उनके द्वारा किया काम न्यू यॉर्कर, स्लेट, द नेशन, वर्जीर्निया क्वाटर्ली रिव्यू और अन्य जगहों पर छपा है और ऑनलाइन भी प्रकाशित हुआ है। जेना, 2016 में मिशिगन यूनिवर्सिटी की नाइट-वॉलेस फे़लो भी रह चुकी हैं।

    पृष्ठ 264 + 08 कलर फोटो पेजेज   रु299

    299.00
  • भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़ – चमन लाल

    399.00
    Add to cart

    भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़ – चमन लाल

    भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़
    चमन लाल

    शहीद भगत सिंह ने कहा था : ‘क्रान्ति की तलवार विचारों की सान पर तेज़ होती है’ और यह भी कि ‘क्रान्ति ईश्वर-विरोधी हो सकती है, मनुष्य-विरोधी नहीं’। ध्यान से देखा जाए तो ये दोनों ही बातें भगत सिंह के महान क्रान्तिकारी व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। लेकिन इस सन्दर्भ में महत्त्वपूर्ण यह है कि भगत सिंह की विचारधारा और उनकी क्रान्तिकारिता के ज्वलन्त प्रमाण जिन लेखों और दस्तावेज़ों में दर्ज हैं, वे आज भी पूर्ववत् प्रासंगिक हैं, क्योंकि ‘इस’ आज़ादी के बाद भी भारतीय समाज ‘उस’ आज़ादी से वंचित है, जिसके लिए उन्होंने और उनके असंख्य साथियों ने बलिदान दिया था। दूसरे शब्दों में, भगत सिंह के क्रान्तिकारी विचार उन्हीं के साथ समाप्त नहीं हो गए, क्योंकि व्यक्ति की तरह किसी विचार को कभी फाँसी नहीं दी जा सकती। कहने की आवश्यकता नहीं कि यह पुस्तक भगत सिंह की इसी विचारधारात्मक भूमिका को समग्रता के साथ हमारे सामने रखती है। वस्तुत: हिन्दी में पहली बार प्रकाशित यह कृति भगत सिंह के भावनाशील विचारों, विचारोत्तेजक लेखों, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों, वक्तव्यों तथा उनके साथियों और पूर्ववर्ती शहीदों की क़लम से निकले महत्त्वपूर्ण विचारों की ऐसी प्रस्तुति है जो वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक स्थितियों की बुनियादी पड़ताल करने में हमारी दूर तक मदद करती है।

    पृष्ठ 380 रु399

    399.00
  • समय का संक्षिप्त इतिहास – स्टीफेन हॉकिंग

    795.00
    Add to cart

    समय का संक्षिप्त इतिहास – स्टीफेन हॉकिंग

    समय का संक्षिप्त इतिहास
    स्टीफेन हॉकिंग

    स्टीफेन हॉकिंग की यह पुस्तक विज्ञान-लेखन की दुनिया में अपनी लोकप्रियता के कारण अतिविशिष्ट स्थान रखती है। वर्ष 1988 में अपने प्रकाशन के मात्र दस वर्षों की अवधि में इस पुस्तक की 10 लाख से ज़्यादा प्रतियाँ बिकीं और आज भी जिज्ञासा की दुनिया में यह पुस्तक बदस्तूर अपनी जगह बनाए हुए है।

    ब्रह्मांड की उत्पत्ति किस प्रकार हुई, यह कहाँ से आया और क्या यह शाश्वत है या किसी ने बाक़ायदा इसकी रचना की है? बुद्धिचालित मनुष्य का उद्भव एक सांयोगिक घटना है या फिर मनुष्य के लिए ब्रह्मांड की रचना की गई, ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो सदा से हमें विचलित-उत्कंठित करते रहे हैं। यह पुस्तक इन सवालों का उत्तर देने का प्रयास करती है। इसमें आरम्भिक भू-केन्द्रिक ब्रह्मांडिकियों से लेकर बाद की सूर्य-केन्द्रिक ब्रह्मांडिकियों से होते हुए एक अनन्त ब्रह्मांड अथवा अनन्त रूप से विस्तृत अनेक ब्रह्मांडों तथा कृमि-छिद्रों की परिकल्पनाओं तक की हमारी विकास-यात्रा का संक्षिप्त और सरलतम वर्णन किया गया है।

    इस संस्करण में पिछले दशक में ब्रह्मांडिकी के क्षेत्र में हासिल की गई नई सूचनाओं और नतीजों को भी सम्मिलित तो  किया ही गया है; साथ ही, पुस्तक के प्रत्येक अध्याय को पूर्णतया परिवर्द्धित करते हुए प्राक्कथन के साथ-साथ वर्म होल और काल-यात्रा पर जो एक नितान्त नवीन अध्याय शामिल किया गया है, उसका महत्त्व सदैव बना रहेगा।

    स्टीफेन हॉकिंग

    स्टीफेन हॉकिंग का जन्म 1942 में इंग्लैंड में हुआ था। आप एक विश्वप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी, ब्रह्मांड विज्ञानी, लेखक और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सैद्धान्तिक ब्रह्मांड केन्द्र के शोध निदेशक रहे।स्टीफेन हॉकिंग ने ‘ब्लैक होल’ और ‘बिग बैंग सिद्धान्त को समझने में अहम् योगदान दिया। उन्हें 12 मानद डिग्रियों और अमेरिका के सबसे अच्छा नागरिक का सम्मान से सम्मानित किया गया था।
    निधन : 14 मार्च, 2018

    Binding : Hard Cover, Deluxe

    पृष्ठ 212   रु795

    795.00
  • फिल्में और संस्कृति – धीरज शर्मा

    250.00
    Add to cart

    फिल्में और संस्कृति – धीरज शर्मा

    धीरज शर्मा

    बीते कुछ दशकों के दौरान, भारत की छवि को बिगाड़ने में कुछ हद तक बॉलीवुड की फिल्मों का हाथ है जिनमें मंदिरों और पुजारियों की खिल्ली उड़ाई जाती है, दिखाया जाता है कि बड़े-बड़े संस्थानों के शिक्षकों को पढ़ाना नहीं आता, शिक्षकों को मूर्ख, राजनेताओं को दुष्ट, पुलिस को निर्दयी, अफसरों को संकीर्ण सोचवाला, जजों को अन्यायी, और हिंदी भाषा बोलनेवालों को हीन दृष्टि से देखा जाता है। क्या आपको आश्चर्य नहीं होता कि बॉलीवुड के फिल्मी गाने और डायलॉग उर्दू में ही क्यों लिखे जाते हैं जबकि बहुत कम ही लोग उर्दू को समझ पाते हैं? क्या आपको इस पर भी आश्चर्य नहीं होता कि हाल की बॉलीवुड की फिल्मों का हीरो कभी मंदिर क्यों नहीं जाता? आखिर क्यों बॉलीवुड की अधिकांश फिल्मों के हीरो अगर हिंदू हैं तो आम तौर पर धर्म का पालन नहीं करते जबकि सारे मुसलमानों को धर्मनिष्ठ दिखाया जाता है? आखिर क्यों कोर्ट-रूम वाली फिल्मों में भी अब भगवद्गीता पर हाथ रख कर किसी व्यक्ति के द्वारा कसम खाने वाले सीन गायब हो गए हैं? क्यों बॉलीवुड की फिल्मों की पृष्ठभूमि में भारतीय ध्वज भी नहीं दिखता? ये महत्त्वपूर्ण प्रश्न हैं जिनकी तह तक जाने की आवश्यकता है। इस पुस्तक का प्रयास है कि इनमें से कुछ प्रश्नों के उत्तर दिए जाएँ। समाज की सोच बनाने में फिल्मों की एक बड़ी भूमिका होती है और इस कारण परदे पर जो कुछ भी दिखाया जाता है, उसे लेकर बॉलीवुड को कहीं-न-कहीं अपनी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है।

    प्रोफेसर धीरज शर्मा एक जाने-माने मैनेजमेंट प्रोफेसर और भारतीय प्रबंधन संस्थान, रोहतक के निदेशक हैं। वह भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद में भी प्रोफेसर (सावकाश) हैं। वह साल 2019 के लिए एकेडमी ऑफ ग्लोबल बिजनेस एडवांसमेंट (अमेरिका) के विशिष्ट ग्लोबल थॉट लीडर हैं। उन्होंने यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के अनेक शिक्षण संस्थानों में अध्यापन किया है। अब तक उनकी 10 पुस्तकें और 150 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। आज भी वह अनेक सरकारी व गैर-सरकारी संगठनों के प्रबंधन बोर्ड में सेवा दे रहे हैं। वह हरियाणा सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद् के सदस्य हैं। वह जेलों के आधुनिकीकरण पर पंजाब सरकार के सलाहकार भी हैं। वह तेजपुर यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति के मनोनीत व्यक्ति, दिल्ली यूनिवर्सिटी के मानद प्रोफेसर जवाहरलाल यूनिवर्सिटी के मानद प्रोफेसर और हृढ्ढञ्जढ्ढश्व मुंबई की अकादमिक परिषद् के बाहरी सदस्य भी हैं। वह डिग्री विशिष्टता पर यूजीसी की स्थायी समिति के सदस्य भी हैं। वह इमर्जिंग इकोनॉमिक केस जर्नल के मुख्य संपादक और जर्नल ऑफ मार्केटिंग चैनल्स के पूर्व सहयोगी संपादक भी हैं।

    पृष्ठ  208 रु250

    250.00
  • जाति व्यवस्था और पितृसत्ता – पेरियार ई.वी. रामासामी

    175.00
    Add to cart

    जाति व्यवस्था और पितृसत्ता – पेरियार ई.वी. रामासामी

    जाति व्यवस्था और पितृसत्ता
    पेरियार ई.वी. रामासामी

    ‘जाति और पितृसत्ता’ ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ के चिन्तन, लेखन और संघर्षों की केन्द्रीय धुरी रही है। उनकी दृढ़ मान्यता थी कि इन दोनों के विनाश के बिना किसी आधुनिक समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता है। जाति और पितृसत्ता के सम्बन्ध में पेरियार क्या सोचते थे और क्यों वे इसके विनाश को आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य एवं अनिवार्य मानते थे? इन प्रश्नों का हिन्दी में एक मुकम्मल जवाब पहली बार यह किताब देती है।

    इस संग्रह के लेख पाठकों को न केवल पेरियार के नज़रिए से बख़ूबी परिचित कराते हैं बल्कि इसकी भी झलक प्रस्तुत करते हैं कि पेरियार जाति एवं पितृसत्ता के विनाश के बाद किस तरह के सामाजिक सम्बन्धों की कल्पना करते थे। इन लेखों को पढ़ते हुए स्त्री-पुरुष के बीच कैसे रिश्ते होने चाहिए, इसकी एक पूरी तस्वीर सामने आ जाती है। इस किताब के परिशिष्ट खंड में पेरियार के सम्पूर्ण जीवन का वर्षवार लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। पेरियार क़रीब 94 वर्षों तक जीवित रहे और अनवरत अन्याय के सभी रूपों के ख़िलाफ़ संघर्ष करते रहे। इस दौरान उन्होंने जो कुछ लिखा-कहा, उसमें से उनके कुछ प्रमुख उद्धरणों का चयन भी परिशिष्ट खंड में है। यही नहीं, इस खंड में तीन लेख पेरियार के अध्येताओं द्वारा लिखे गए हैं। पहले लेख में प्रसिद्ध विदुषी ललिता धारा ने महिलाओं के सन्दर्भ में पेरियार के चिन्तन, लेखन और संघर्षों के विविध आयामों को प्रस्तुत किया है। दूसरा और तीसरा लेख पेरियार के सामाजिक सघर्षों का एक गहन और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इनके लेखक टी. थमराईकन्न और वी. गीता तथा एस.वी. राजादुरै हैं। ये तीनों लेखक पेरियार के गम्भीर अध्येता माने जाते हैं। किताब का यह अन्तिम हिस्सा उनके चिन्तन, लेखन और संघर्षों के विविध चरणों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

    पृष्ठ-150 रु175

    175.00
  • भगत सिंह - 2 - लेख

    भगत सिंह – 2 – लेख

    165.00
    Add to cart

    भगत सिंह – 2 – लेख

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH LEKH : KHAND-2

    पृष्ठ 164  रु165

    165.00
  • भगत सिंह - 3 - क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    भगत सिंह – 3 – क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    150.00
    Add to cart

    भगत सिंह – 3 – क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH KRANTIKARIYO KE REKHACHITRA : KHAND-3

    पृष्ठ 146  रु150

    150.00
  • भगत सिंह - 4 - जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    भगत सिंह – 4 – जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    200.00
    Add to cart

    भगत सिंह – 4 – जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH JAIL NOTEBOOK AUR DON BRIN KI ATMKATHA KA ANUVAD : KHAND-4

    पृष्ठ 222  रु200

    200.00