शेखर जोशी द्वारा पुस्तकें

Books by Shekhar Joshi [शेखर जोशी] – Buy Online

Showing all 2 results

Show Grid/List of >5/50/All>>
  • नौरंगी बीमार है – शेखर जोशी

    75.00
    Add to cart

    नौरंगी बीमार है – शेखर जोशी

    नौरंगी बीमार है
    शेखर जोशी

    सामान्य जीवन-स्थितियों में भी ऐसा बहुत कम होता है, जिसकी मूल्यवत्ता हमें दूर तक सोचने के लिए विवश करती है। लेकिन यह कार्य एक सक्षम और अनुभूतिशील रचनाकार ही कर सकता है और शेखर जोशी ने इन कहानियों के रूप में यही कार्य सम्पादित किया है।

    शेखर जोशी की ये कहानियाँ हमारे समक्ष जिस यथार्थ का उद्‌घाटन करती हैं, उसके पीछे समकालीन जन-जीवन की बहुविध विडम्बनाओं को महसूस किया जा सकता है। सपनों की वास्तविकता से अपरिचित बच्चों की ख़ुशी हो, या बिरादरी की दलदल में फँसे व्यक्ति की मनोदशा—लेखकीय दृष्टि उन्हें एक नए अर्थ-गाम्भीर्य से भर देती है। उसके पास आदर्शवादी निर्णय हैं तो उनके सामने खड़ा कठोर और भयावह यथार्थ भी है। अकारण नहीं कि दफ़्तरी पुर्जे नौरंगी की बीमारी वर्तमान व्यवस्था की ही बीमारी पर एक तीखा व्यंग्य बनकर उभरती है।

    कहना न होगा कि शेखर जोशी की ये कहानियाँ बिना किसी शोर-शराबे के हमारे सोच के विभिन्न स्तरों को स्पर्श और झंकृत करनेवाले रचनात्मक गुणों से परिपूर्ण हैं।

    पृष्ठ-114 रु75

    75.00
  • प्रतिनिधि कहानियाँ : शेखर जोशी – शेखर जोशी

    75.00
    Add to cart

    प्रतिनिधि कहानियाँ : शेखर जोशी – शेखर जोशी

    प्रतिनिधि कहानियाँ : शेखर जोशी
    शेखर जोशी

    शेखर जोशी की कहानियों में शिल्प और संवेदना के अन्तर्सम्बन्धों की सुरम्य रचना के साथ जीवन और समाज के सहज उन्नयन एवं परिवर्तनकारी दृष्टि के प्रति दायित्वबोध साफ़ दृष्टिगोचर होता है। कथात्मक गठन में भाषा के सूक्ष्म उपयोग का उन जैसा आधुनिक बोध हिन्दी कहानी में अपरिचित है।

    अत्यन्त सहज और ठंडी भाषा के माध्यम से ये कहानियाँ हमारे समक्ष जिस यथार्थ का उद्घाटन करती हैं, उसके पीछे समकालीन जन-जीवन की बहुविध विडम्बनाओं को महसूस किया जा सकता है। सपनों की वास्तविकता से अपरिचित बच्चों की ख़ुशी हो या बिरादरी की दलदल में फँसे व्यक्ति की मनोदशा—लेखकीय दृष्टि उन्हें एक अर्थ-गाम्भीर्य से भर देती है। उनके पास आदर्शवादी निर्णय हैं तो उनके सामने खड़ा कठोर और भयावह यथार्थ भी है।

    वस्तुतः शेखर जोशी की ये कहानियाँ बिना किसी शोर-शराबे के हमारी सोच के विभिन्न स्तरों को स्पर्श और झंकृत करनेवाले रचनात्मक गुणों से परिपूर्ण हैं।

    पृष्ठ-156 रु75

    75.00