गोपाल राय द्वारा पुस्तकें

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  • उपन्यास की संरचना - गोपाल राय

    उपन्यास की संरचना – गोपाल राय

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    उपन्यास की संरचना – गोपाल राय

    उपन्यास की संरचना

    गोपाल राय

    उपन्यास एक अमूर्त रचना-वस्तु है। ‘वस्तु’ है तो उसका ‘रूप’ भी होगा ही। ‘रूप’ का एक पक्ष वह है, जिसे उपन्यासकार निर्मित करता है। उसका दूसरा पक्ष वह है जिसे पाठक अपनी चेतना में निर्मित करता है। पर उपन्यास का ‘रूप’ चाहे जितना भी अमूर्त और ‘पाठ-सापेक्ष’ हो, वह होता जरूर है। उसकी संरचना को समझना आलोचक के लिए चुनौती है, पर वह सर्वथा पकड़ के बाहर है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। अँगरेजी और यूरोप की अन्य भाषाओं में इसके प्रयास हुए हैं और इस विषय पर अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं। पर उन आलोचकों ने स्वभावतः अपनी भाषाओं के उपन्यासों को ही अपने विवेचन का आधार बनाया है। यहाँ तक कि भारतीय साहित्य में उपलब्ध कथा-रूपों की ओर भी उनकी दृष्टि नहीं गई है। हिन्दी आलोचना भी उपन्यास की ओर विगत कुछ दशकों से ही उन्मुख हुई है। पर आलोचकों की दृष्टि जितनी उसके कथ्य पर रही है, उतनी उसकी संरचना पर नहीं। उपन्यास किस प्रकार ‘बनता’ है, पाठक की चेतना में वह कैसे ‘रूप’ ग्रहण करता है, इस किताब में इसी की तलाश लेखक का उद्देश्य है।
    आरम्भिक दो परिच्छेदों में औपन्यासिक संरचना का सैद्धान्तिक विवेचन करने के बाद परवर्ती आठ परिच्छेदों में लगभग दो दर्जन हिन्दी उपन्यासों की संरचना का सविस्तार विवेचन किया गया है। विवेच्य रचनाओं के चयन में ध्यान इस बात का रखा गया है कि वे किसी संरचनाविशेष का प्रतिनिधित्व करती हों।
    हिन्दी में उपन्यास की संरचना के विवेचन का यह पहला गम्भीर प्रयास है। पर यह कितना सफल है, इसका निर्णय तो पाठक ही करेंगे।

    पृष्ठ-491 रु995

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  • हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 1 (1900-1950) - गोपाल राय

    हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 1 (1900-1950) – गोपाल राय

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    हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 1 (1900-1950) – गोपाल राय

    हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 1 (1900-1950)

    गोपाल राय

    पृष्ठ-480 रु995

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  • हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 2 (1951-1975) - गोपाल राय

    हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 2 (1951-1975) – गोपाल राय

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    हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 2 (1951-1975) – गोपाल राय

    हिन्दी कहानी का इतिहास : खंड 2 (1951-1975)

    गोपाल राय

    पृष्ठ-596 रु995

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  • हिन्दी भाषा का विकास – गोपाल राय

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    हिन्दी भाषा का विकास – गोपाल राय

    हिन्दी भाषा का विकास

    हिन्दी भाषा का विकास
    गोपाल राय

    यह पुस्तक संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग के अतिरिक्त विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए भी अत्यन्‍त उपयोगी है। पुस्तक IAS/PCS के हिन्‍दी साहित्य प्रथम प्रश्न-पत्र(वैकल्पिक विषय) के लिए अत्यन्‍त महत्‍त्‍वपूर्ण है। हिन्‍दी भाषा एवं नागरी लिपि के इतिहास सम्‍बन्‍धी प्रत्येक बिन्‍दु का सुव्यवस्थित अध्ययन इस किताब में शामिल है।

    पृष्ठ-288 रु199

    199.00