Bhagat Singh: Books

Books by Bhagat Singh | Books on Bhagat Singh

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  • Bhagat Sing Book - Punjabi

    ਮੈਂ ਨਾਸਤਿਕ ਕਿਉਂ ਹਾਂ – ਭਗਤ ਸਿੰਘ

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    ਮੈਂ ਨਾਸਤਿਕ ਕਿਉਂ ਹਾਂ – ਭਗਤ ਸਿੰਘ

    ਮੈਂ ਨਾਸਤਿਕ ਕਿਉਂ ਹਾਂ
    ਭਗਤ ਸਿੰਘ

    ਜਿਸ ਦਿਨ ਮਨੁੱਖਤਾ ਦੀ ਸੇਵਾ ਤੇ ਦੁੱਖ ਝਾਗ ਰਹੀ ਮਨੁੱਖਤਾ ਦੇ ਨਜ਼ਾਤ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਨਾਲ ਪੇਰਿਤ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਮਰਦਾ – ਅੰਰਤਾਂ ਅੱਗੇ ਆ ਗਏ , ਜਿਹੜੇ ਇਸ ਬਗੈਰ ਹੋਰ ਕਿਸੇ ਚੀਜ਼ ਤੇ ਜੀਵਨ ਨਹੀਂ ਲਗਾ ਸਕਦੇ, ਉਸ ਦਿਨ ਤੋਂ ਮੁਕਤੀ ਦਾ ਯੁੱਗ ਸ਼ੁਰੁ ਹੋਵੇਗਾ।

    ਉਹ ਦਮਨਕਾਰੀਆਂ, ਲੋਟੁਆਂ ਤੇ ਜ਼ਾਲਮਾਂ ਨੂੰ ਏਸ ਗੱਲੋਂ ਨਹੀਂ ਵੈਗਾਰਨਗੇ ਕਿ ਉਹ ਇਸ ਜਾਂ ਅਗਲੇ ਜਨਮ ਵਿੱਚ ਜਾਂ ਮੰਤ ਮਗਰੋਂ ਬਹਿਸ਼ਤ ਵਿੱਚ ਬਾਦਸ਼ਾਹ ਬਣ ਜਾਣਗੇ ਜਾਂ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕੋਈ ਇਨਾਮ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ, ਸਗੋਂ ਮਨੁੱਖਤਾ ਦੀ ਧੰਣ ਤੱ ਗੁਲਾਮੀ ਦਾ ਜੂਲਾ
    ਲਾਹੁਣ ਲਈ ਅਤੇ ਆਜ਼ਾਦੀ ਤੇ ਅਮਨ ਕਾਇਮ ਕਰਨ ਲਾਈ ਹੀ ਉਹ ਇਸ ਬਿਖੜੇ ਪਰ ਇਕੋ-ਇਕ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਮਾਰਗ ਉੱਤੇ ਚੱਲਣਗੇ ।

    ਪੰਨੇ 22  ਕੀਮਤ  ਰੁ 55

    55.00
  • Bhagat Singh Book - Hindi

    मैं नास्तिक क्याें हूँ – भगतसिंह

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    मैं नास्तिक क्याें हूँ – भगतसिंह

    मैं नास्तिक क्याें हूँ
    और ‘ड्रीमलैण्ड’ की भूमिका

     

    भगतसिंह

     

    ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ में भगतसिंह ने सृष्टि के विकास और गति की भौतिकवादी समझ पेश करते हुए उसके पीछे किसी मानवेतर ईश्वरीय सत्ता के अस्तित्व की परिकल्पना को वैज्ञानिक ढंग से निराधार सि( किया है। ‘ड्रीमलैण्ड की भूमिका’ में कृति की समीक्षा करते हुए भगतसिंह ने समाज-व्यवस्था, जीवन, क्रान्ति और भावी समाज के बारे में जो विचार प्रस्तुत किये हैं वे उनकी विकसित हो रही वैज्ञानिक भौतिकवादी दृष्टि का पता देते हैं। साथ ही इसमें उन्होंने अपने से पहले के क्रान्तिकारी आन्दोलन और उसकी विचारधारा की जो समीक्षा की है वह इस बात का स्पष्ट
    प्रमाण है कि पुराने क्रान्तिकारी मध्यमवर्गीय आतंकवाद के विचारों से नाता तोड़कर भगतसिंह आगे बढ़ चुके थे।

    आज भी नौजवानों में जो तरह-तरह के प्रतिगामी विचार, अवैज्ञानिक दृष्टिकोण, अन्धविश्वास, नियतिवाद आदि व्याप्त हैं, उन्हें देखते हुए भगतसिंह के ये दोनों लेख आज भी बहुत प्रासंगिक हैं। ये लेख हमें भारतीय मुक्तिसंघर्ष के इतिहास में क्रान्तिकारी आन्दोलन और भगतसिंह के बारे में नये सिरे से सोचने के लिए विवश तो करते ही हैं,
    क्रान्तिकारी वैज्ञानिक चिन्तन की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

    पृष्ठ 36   रु59

    59.00
  • सरफ़रोशी की तमन्ना – कुलदीप नैयर

    250.00
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    सरफ़रोशी की तमन्ना – कुलदीप नैयर

    सरफ़रोशी की तमन्ना
    कुलदीप नैयर

    भगत सिंह (1907-1931) का समय वही समय था जब भारत का स्वतंत्रता-संग्राम अपने उरूज की तरफ़ बढ़ रहा था और जिस समय आंशिक आज़ादी के लिए महात्मा गांधी के अहिंसात्मक, निष्क्रिय प्रतिरोध ने लोगों के धैर्य की परीक्षा लेना शुरू कर दिया था।

    भारत का युवा वर्ग भगत सिंह के सशस्त्र विरोध के आह्वान और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के आर्मी विंग की अवज्ञापूर्ण साहसिकता से प्रेरणा ग्रहण कर रहा था, जिससे भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव और राजगुरु जुड़े थे। ‘इंकिलाब ज़िन्दाबाद’ का उनका नारा स्वतंत्रता-संघर्ष का उद्घोष बन गया था।

    लाहौर षड्यंत्र मामले में एक दिखावटी मुक़दमा चलाकर ब्रिटिश सरकार द्वारा भगत सिंह को मात्र 23 साल की आयु में फाँसी पर चढ़ा दिए जाने के बाद भारतवासियों ने उन्हें, उनके युवकोचित साहस, नायकत्व और मौत के प्रति निडरता को देखते हुए शहीद का दर्जा दे दिया। जेल में लिखी हुई उनकी चीज़ें तो अनेक वर्ष उपरान्त, आज़ादी के बाद सामने आईं। आज इसी सामग्री के आधार पर उन्हें देश की आज़ादी के लिए जान देनेवाले अन्य शहीदों से अलग माना जाता है। उनका यह लेखन उन्हें सिर्फ़ एक भावप्रवण स्वतंत्रता सेनानी से कहीं ज़्यादा एक ऐसे अध्यवसायी बुद्धिजीवी के रूप में सामने लाता है जिसकी प्रेरणा के स्रोत, अन्य विचारकों के साथ, मार्क्स, लेनिन, बर्ट्रेंड रसेल और विक्टर ह्यूगो थे और जिसका क्रान्ति-स्वप्न अंग्रेज़ों को देश से निकाल देने-भर तक सीमित नहीं था, बल्कि वह उससे कहीं आगे एक धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी भारत का सपना सँजो रहा था।

    इसी असाधारण युवक की सौवीं जन्मशती के अवसर पर कुलदीप नैयर इस पुस्तक में उस शहीद के पीछे छिपे आदमी, उसके विश्वासों, उसके बौद्धिक रुझानों और निराशाओं पर प्रकाश डाल रहे हैं।

    यह पुस्तक पहली बार स्पष्ट करती है कि हंसराज वोहरा ने भगत सिंह के साथ धोखा क्यों किया, साथ ही इसमें सुखदेव के ऊपर भी नई रोशनी में विचार किया गया है जिनकी वफ़ादारी पर कुछ इतिहासकारों ने सवाल उठाए हैं। लेकिन इसके केन्द्र में भगत सिंह का हिंसा का प्रयोग ही है जिसकी गांधी जी समेत अन्य अनेक लोगों ने इतनी कड़ी आलोचना की है। भगत सिंह की मंशा अधिक से अधिक लोगों की हत्या करके या अपने हमलों की भयावहता से अंग्रेज़ों के दिल में आतंक पैदा करना नहीं था, न उनकी निर्भयता का उत्स सिर्फ़ बन्दूक़ों और जवानी के साहस में था। यह उनके अध्ययन से उपजी बौद्धिकता और उनके विश्वासों की दृढ़ता का मिला-जुला परिणाम था।

    पृष्ठ 223 रु250

    250.00
  • भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़ – चमन लाल

    399.00
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    भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़ – चमन लाल

    भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़
    चमन लाल

    शहीद भगत सिंह ने कहा था : ‘क्रान्ति की तलवार विचारों की सान पर तेज़ होती है’ और यह भी कि ‘क्रान्ति ईश्वर-विरोधी हो सकती है, मनुष्य-विरोधी नहीं’। ध्यान से देखा जाए तो ये दोनों ही बातें भगत सिंह के महान क्रान्तिकारी व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। लेकिन इस सन्दर्भ में महत्त्वपूर्ण यह है कि भगत सिंह की विचारधारा और उनकी क्रान्तिकारिता के ज्वलन्त प्रमाण जिन लेखों और दस्तावेज़ों में दर्ज हैं, वे आज भी पूर्ववत् प्रासंगिक हैं, क्योंकि ‘इस’ आज़ादी के बाद भी भारतीय समाज ‘उस’ आज़ादी से वंचित है, जिसके लिए उन्होंने और उनके असंख्य साथियों ने बलिदान दिया था। दूसरे शब्दों में, भगत सिंह के क्रान्तिकारी विचार उन्हीं के साथ समाप्त नहीं हो गए, क्योंकि व्यक्ति की तरह किसी विचार को कभी फाँसी नहीं दी जा सकती। कहने की आवश्यकता नहीं कि यह पुस्तक भगत सिंह की इसी विचारधारात्मक भूमिका को समग्रता के साथ हमारे सामने रखती है। वस्तुत: हिन्दी में पहली बार प्रकाशित यह कृति भगत सिंह के भावनाशील विचारों, विचारोत्तेजक लेखों, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों, वक्तव्यों तथा उनके साथियों और पूर्ववर्ती शहीदों की क़लम से निकले महत्त्वपूर्ण विचारों की ऐसी प्रस्तुति है जो वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक स्थितियों की बुनियादी पड़ताल करने में हमारी दूर तक मदद करती है।

    पृष्ठ 380 रु399

    399.00
  • शहीद भगत सिंह : क्रान्ति का साक्ष्य – सुधीर विद्यार्थी

    295.00
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    शहीद भगत सिंह : क्रान्ति का साक्ष्य – सुधीर विद्यार्थी

    शहीद भगत सिंह : क्रान्ति का साक्ष्य
    सुधीर विद्यार्थी

    विगत कुछ वर्षों से शहीदे–आज़म भगतसिंह के बुत को अपनी–अपनी तरह तराशने की कोशिशें इतिहास, राजनीति और संस्कृति की दुनिया में हमें दिखाई पड़ीं। बुद्धिजीवियों और प्रगतिशीलों के मध्य भगतसिंह विमर्श का मुद्दा बने रहे। उनके अदालती बयान, आलेख, पत्र, निबन्ध, जेल नोटबुक उन्हें एक सचेत बौद्धिक क्रान्तिकारी बनाते हैं। वहीं दूसरी ओर उनका बेहद सक्रिय क्रान्तिकारी जीवन जिसकी शुरुआत उन्होंने 1925–26 से की थी और जिसका अन्त 23 मार्च, 1931 को लाहौर जेल में उनकी फाँसी से हुआ। अर्थात् कुल मिलाकर लगभग छह–सात वर्षों की तूफ़ानी ज़िन्दगी जहाँ वे काकोरी केस के रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसीघर से छुड़ाने की ख़तरनाक योजना में अपनी प्रारम्भिक जद्दोजेहद करते दिखाई देते हैं। तब ‘बलवन्त सिंह’ नाम से उनकी इब्तदाई गतिविधियाँ जैसे भविष्य के गम्भीर क्रान्तिधर्मी की रिहर्सलें थीं। काकोरी की फाँसियों (1927) के पश्चात् भगतसिंह विचार की दुनिया में अद्भुत छलाँग लगाते हैं—अपने पूर्ववर्ती क्रान्तिकारी आन्दोलन को बहुत पीछे छोड़ते हुए।

    भगतसिंह के समस्त दस्तावेज़ों, अदालती बयानों, पत्रों, रेखाचित्रों, निबन्धों, जेल नोटबुक और उनके मूल्यांकन सम्बन्धी अभिलेखीय साक्ष्यों के बीच उनके साथियों के लिखे संस्मरणों की यह प्रथम कृति भगतसिंह से प्यार करनेवाले लोगों के हाथों में सौंपते हुए मुझे निश्चय ही बड़ी प्रसन्नता है। इन दुर्लभ स्मृतियों को सामने रखकर वे भगतसिंह के जीवन और उस युग के क्रान्तिकारी घटनाक्रम की एक स्पष्ट छवि निर्मित करने के साथ ही अपने समय के सवालों से टकराने के लिए आगे की अपनी क्रान्तिकारी भूमिका की भी खोजबीन कर सकेंगे, ऐसी आशा है।

    पृष्ठ 344 रु295

    295.00
  • आमूल क्रान्ति का ध्वज-वाहक भगतसिंह – डॉ. रणजीत

    160.00
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    आमूल क्रान्ति का ध्वज-वाहक भगतसिंह – डॉ. रणजीत

    आमूल क्रान्ति का ध्वज-वाहक भगतसिंह
    डॉ. रणजीत

    भगतिंसह को यदि मार्क्सवादी ही कहना हो, तो एक स्वयंचेता या स्वातंत्र्यचेता मार्क्सवादी कहा जा सकता है। रूढ़िवादी मार्क्सवादियों की तरह वे हिंसा को क्रान्ति का अनिवार्य घटक या साधन नहीं मानते। वे स्पष्ट शब्दों में कहते हैं—‘क्रान्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष अनिवार्य नहीं है और न ही उसमें व्यक्तिगत प्रतिहिंसा के लिए कोई स्थान है। वह बम और पिस्तौल का सम्प्रदाय नहीं है।’ अन्यत्र वे कहते हैं—‘हिंसा तभी न्यायोचित हो सकती है जब किसी विकट आवश्यकता में उसका सहारा लिया जाए। अहिंसा सभी जन-आन्दोलनों का अनिवार्य सिद्धान्त होना चाहिए।’

    आज जब भगतसिंह के समय का बोल्शेविक ढंग समाजवाद मुख्यत: जनवादी मान-मूल्यों की निरन्तर अवहेलनाओं के कारण, समता-स्थापन के नाम पर मनुष्य की मूलभूत स्वतंत्रता के दमन के कारण, ढह चुका है, यह याद दिलाना ज़रूरी लगता है कि स्वतंत्रता उनके लिए कितना महत्त्वपूर्ण मूल्य था। स्वतंत्रता को वे प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार घोषित करते हैं। क्योंकि वे अराजकतावाद के माध्यम से मार्क्सवाद तक पहुँचे थे, इसलिए स्वतंत्रता के प्रति उनके प्रेम और राजसत्ता के प्रति उनकी घृणा ने उन्हें कहीं भी मार्क्सवादी जड़सूत्रवाद का शिकार नहीं होने दिया।

    पृष्ठ 131 रु160

    160.00
  • क्रान्तिवीर भगत सिंह : ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’’ – चमन लाल

    499.00
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    क्रान्तिवीर भगत सिंह : ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’’ – चमन लाल

    क्रान्तिवीर भगत सिंह : ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’’
    चमन लाल

    ‘क्रान्तिवीर भगत सिंह : ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’’ आज़ादी की लड़ाई, ख़ासकर इन्क़लाबी नौजवानों के संघर्ष की हक़ीक़त तलाशती कोशिश का नतीजा है।

    पुस्तक में शामिल पत्रिकाओं ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’ की सामग्री हिन्दुस्तान की आज़ादी के संग्राम को ठीक से समझने के लिए बेहद ज़रूरी है।

    ‘अभ्युदय’ ने भगत सिंह के मुक़दमे और फाँसी के हालात पर भरपूर सामग्री छापी और 8 मई, 1931 को प्रकाशित उसका ‘भगत सिंह विशेषांक’ ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिया गया।

    भगत सिंह के जीवन, व्यक्तित्व और परिवार को लेकर जो सामग्री ‘अभ्युदय’ व ‘भविष्य’ में छापी गई—विशेषतः भगत सिंह व उनके परिवार के चित्र—उसी से पूरे देश में भगत सिंह की विशेष छवि निर्मित हुई।

    ‘भविष्य’ साप्ताहिक इलाहाबाद से रामरख सिंह सहगल के सम्पादन में निकलता था। पहले पं. सुन्दरलाल के सम्पादन में ‘भविष्य’ निकलता था, जिसमें रामरख सिंह सहगल काम करते थे।

    2 अक्टूबर, 1930 को गांधी जयन्ती पर रामरख सिंह सहगल ने, जो स्वयं युक्तप्रान्त कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थे, ‘भविष्य’ साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू किया। पहले अंक से ही भगत सिंह आदि पर सामग्री प्रकाशित कर, ‘भविष्य’ ने सनसनी फैला दी। ‘भविष्य’ में भगत सिंह की फाँसी के बाद के हालात का जीवन्त चित्रण हुआ है।

    ‘भविष्य’ और ‘अभ्युदय’ से कुछ चुनिन्दा चित्र इस किताब में शामिल किए गए हैं।

    सम्पादक प्रो. चमन लाल ने विलुप्तप्राय तथ्यों को इस पुस्तक में सँजोकर ऐतिहासिक कार्य किया है। वस्तुतः इस इन्क़लाबी वृत्तान्त को पढ़ना स्वतंत्रता की अदम्य जिजीविषा से साक्षात्कार करना है।

    पृष्ठ 560 रु499

    499.00
  • भगत सिंह को फँसी : खंड 2 – मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

    295.00
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    भगत सिंह को फँसी : खंड 2 – मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

    भगत सिंह को फँसी : खंड 2
    मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

    यह पुस्तक ‘भगत सिंह को फांसी-1’ का ही दूसरा भाग है। इसमें लाहौर साज़िश केस के दौरान हुई 457 गवाहियों में से महत्त्वपूर्ण गवाहियों के तो पूर्ण विवरण दिए गए हैं, जबकि शेष गवाहियों के तथ्य-सार दिए गए हैं। शहीद सुखदेव ने इस दस्तावेज़ का बारीकी से अध्ययन किया था और उनके द्वारा अंकित की गई टिप्पणियों का उल्लेख सम्बन्धित गवाहियों के ब्योरे में किया गया है। यहाँ यह कहना भी प्रासंगिक है कि इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ को पहली बार प्रकाशित किया जा रहा है, जिसके द्वारा पाठकों को अनेक विचित्र तथ्य जानने का अवसर प्राप्त होगा। ज़िक्र योग्य है कि ये गवाहियाँ विशेष ट्रिब्यूनल के समक्ष 5 मई, 1930 से 26 अगस्त, 1930 तक हुई थीं जबकि इससे पूर्व 10 जुलाई, 1929 से 3 मई, 1930 तक मुक़दमा विशेष मजिस्ट्रेट की अदालत में चला था।

    पृष्ठ 344 रु295

    295.00
  • भगत सिंह को फांसी : खंड 1 – मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

    299.00
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    भगत सिंह को फांसी : खंड 1 – मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

    भगत सिंह को फांसी : खंड 1
    मलवेन्दरजीत सिंह वढ़ैच

    भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।

    पृष्ठ 251 रु299

    299.00
  • भगत सिंह - 1 - पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान

    भगत सिंह – 1 – पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान

    170.00
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    भगत सिंह – 1 – पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH : KHAND-1
    PATR, TAAR, PARCHE OR ADALATI BAYAN

    पृष्ठ 168  रु170

    170.00
  • भगत सिंह - 2 - लेख

    भगत सिंह – 2 – लेख

    165.00
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    भगत सिंह – 2 – लेख

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH LEKH : KHAND-2

    पृष्ठ 164  रु165

    165.00
  • भगत सिंह - 3 - क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    भगत सिंह – 3 – क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    150.00
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    भगत सिंह – 3 – क्रांतिकारियों के रेखाचित्र

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH KRANTIKARIYO KE REKHACHITRA : KHAND-3

    पृष्ठ 146  रु150

    150.00
  • भगत सिंह - 4 - जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    भगत सिंह – 4 – जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    200.00
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    भगत सिंह – 4 – जेल नोट बुक और डॉन ब्रीन की आत्मकथा का अनुवाद

    चमन लाल

    क्रांतिकारी स्वाधीनता सेनानी शहीद भगत सिंह का नाम भारतीय आज़ादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। भारतीय जनमानस में उनकी छवि एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में अंकित है। अपने आठ वर्ष के छोटे से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में भगत सिंह की बौद्धिक- वैचारिक सक्रियता अभूतपूर्व रही । हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में उनका लेखन उनकी अपूर्व बौद्धिक प्रतिभा और व्यापक अध्ययनवृत्ति का परिचायक है। भगत सिंह के सुहृद अध्येता एवं शोधकर्ता प्रोफेसर चमन लाल ने बड़े ही परिश्रम से उनके लेखन को एकत्र एवं संपादित कर हिंदी पाठकों को उपलब्ध कराया है।

    भगत सिंह का यह लेखन ‘ प्रकाशन विभाग’ और ‘ सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन ‘ की संयुक्त प्रकाशन योजना के अंतर्गत चार खंडों में प्रकाशित किया जा रहा है।

    पहले खंड में भगत सिंह के पत्र, तार, पर्चे और अदालती बयान संकलित हैं।

    दूसरे खंड में विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में छपे भगत सिंह के लेख शामिल किए गए हैं।

    तीसरे खंड में क्रांतिकारियों के रेखाचित्र शामिल किए गए हैं।

    चौथे खंड में भगत सिंह की जेल नोटबुक है जिसमें 1929-31 के दौरान जेल में पढ़ी गई पुस्तकों से लिए गए नोट्स और उद्धरणों का हिंदी अनुवाद है। इसके साथ ही क्रांतिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा का भगत सिंह द्वारा किया गया अनुवाद भी इस खंड में प्रस्तुत है।

    क्रांतिकारी के वैयक्तिक, राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन के अंतरंगता को उद्घाटित करते ये दस्तावेज़ स्वाधीनता संग्राम का दहकता इतिहास है जिसे पढ़ना और जानना आज के पाठक की बुनियादी ज़रूरत है ताकि वह अपनी जड़ों से, अपनी परंपरा से जुड़ सके और अपने वर्तमान के ज्वलंत प्रश्नों के समाधान में उससे सहायता पा सके।

    ये चारों खंड एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और संबद्ध भी | इन्हें अलग-अलग पुस्तक के रूप में भी पढ़ा जा सकता है और सिलसिलेवार संबद्ध दस्तावेज़ों के रूप में भी । ‘भगत सिंह : अद्वितीय व्यक्तित्व ‘ शीर्षक संपादक की भूमिका प्रथम खंड में दी गई है। आशा है हिंदी पाठक समाज में इनका भरपूर स्वागत होगा।

    BHAGAT SINGH JAIL NOTEBOOK AUR DON BRIN KI ATMKATHA KA ANUVAD : KHAND-4

    पृष्ठ 222  रु200

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  • Bhagat Singhinte Jail Diary ഭഗത് സിങ്ങിന്റെ ജയൽ ഡയറി

    ഭഗത് സിങ്ങിന്റെ ജയൽ ഡയറി

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    ഭഗത് സിങ്ങിന്റെ ജയൽ ഡയറി

    ഭഗത് സിങ്ങിന്റെ ജയൽ ഡയറി

    കൊലക്കയറിനു മുന്നിൽ പതറാതെ

     

    ഇന്ത്യൻ യുവത്വത്തിന് ഒരു പ്രചോദന പുസ്തകം

     

    ഇരുപത്തൊന്നാം നൂറ്റാണ്ടിലെ ഇന്ത്യൻ യുവത്വത്തിനു വേണ്ടി പുനരാവിഷ്ക്കരിക്കപ്പെട്ട ഉജ്വലമായ കൃതിയാണ് ഭഗത് സിങ്ങിന്റെ ജയിൽ ഡയറി. മുതലാളിത്തത്തിന്റെ പ്രലോഭനങ്ങളിൽ കുടുങ്ങി ദിശാബോധം നഷ്ടമാകുന്ന ഒരു യുവതലമുറയല്ല നമുക്കുവേണ്ടത് എന്ന് നമ്മെ ഓർമപ്പിക്കുന്ന കൃതി . ബ്രിട്ടീഷ് ഭരണകാലത്തു 1923 ൽ ജയിലറപൂകി 1924 ൽ കഴുവിലേക്കപെട്ട ഒരു ധീരവിപ്ലവകാരിയുടെ ജ്വലിക്കുന്ന വായനയുടെയും ചിന്തകളുടെയും സമാഹാരമാണ് ഈ കൃതി . ഭഗത് സിങ്ങിന്റെയും കൂട്ടാളികളുടെയും വീരമൃത്യ സംഭവിച്ചിട്ട് ഏതാണ്ട് ഒരു നൂറ്റാണ്ടു തികയാറായി. സ്വാതന്ത്ര്യം നേടി ഒരു നീണ്ട ദേശീയ കാലഘട്ടവും കടന്നുപോയി. കാലവും കഥയും മാറിയെങ്കിലും ഭഗത് സിങ്ങ് ആർക്കുവേണ്ടി രക്തസാക്ഷിത്വം വരിച്ചുവോ ആ ജനത ഇപ്പോഴും നിസ്വരും നിരാലംബരുമാണ്. ഈ കൃതിയുടെ ആന്തരിക പ്രാധാന്യം അതുതന്നെയാണ്.

    വിവർത്തനം – ബിനോയ് വിശ്വം

     

    ഭഗത്‌ സിങ്‌ – ന്റെഹുവിന്റെ ഭാഷയില്‍ പറഞ്ഞാല്‍ ബ്രിട്ടീഷ വിരുദ്ധ സമരത്തിന്റെ ‘ഫോക്‌ ഹീറോ” ആണ്‌. തീക്ഷണബുദ്ധി, നിര്‍ഭയത, സാഹസികത, ആദര്‍ശപ്രേമം,
    ദേശാഭിമാനം. ജിജ്ഞാസ ഇങ്ങനെ നാടോടിക്കഥകളിലെ നായകന്മാരുടെ
    എല്ലാ ഗുണങ്ങളും തികഞ്ഞ തന്റെ പ്രവര്‍ത്തനങ്ങളിലൂടെയെന്ന പോലെതന്നെ കാരാഗൃഹവാസത്തിലൂടെയും ഇരുപത്തിനാലാം വയസ്സില്‍ ഏറ്റുവാങ്ങേണ്ടി വന്ന
    മരണശിക്ഷയിലൂടെയും അനശ്വരനാക്കപ്പെട്ട, നമ്മുടെ സ്വന്തം ചെ ഗവേരാ എന്നു പറയാം.
    ഈ ഡയറിക്കുറിപ്പുകള്‍ സുനിശ്ചിതമായ തന്റെ മൃത്യുവിന്നു മുന്‍പിലും പതറാതെ ഒമാര്‍ ഖയ്യാം മുതല്‍ വേഡ്സ്വര്‍ത്ത്‌ വരെയുള്ളവരുടെ കവിതകള്‍  പകര്‍ത്തിയെഴുതുകയും മാര്‍ക്സിന്റെയും എംഗല്‍സിന്റെയും അടിസ്ഥാന്രഗന്ഥങ്ങള്‍ വായിച്ചു കുറിക്കപ്പെടുകയും സ്‌നേഹത്തിന്റെയും ത്യാഗത്തിന്റെയും സാമൂഹിക സന്ദർഭർത്തിൽ വെച്ച് പുനർ നിർവചിക്കുകയും ചെയ്ത ഒരു യുവാവിന്റെ ചോര പൊടിയുന്ന, കോരിത്തരിപ്പുക്കുന്ന ജീവിത സാക്ഷ്യങ്ങളാണ്. 
    –  സച്ചിദാനന്ദൻ

     

    “ഏതു രാജ്യത്തിന്റെ നികുതി പണത്തില്‍ നിന്നായാലും ഒരു വ്യക്തിയുടെ സുഖസൌകര്യങ്ങള്‍ക്കായി പ്രതിവര്‍ഷം 10 ലക്ഷം പവന്‍ മാറ്റിവെയ്ക്കു ന്നതിനെക്കുറിച്ച്‌ പറയുന്നതുതന്നെ മനുഷ്യത്വഹീനമാണ്‌. ഇല്ലായ്മകളുടെ വേദന പേറി ദുരിതങ്ങളുമായി മല്ലടിക്കുന്ന പതിനായിരങ്ങളാണ്‌ ഈ ധൂര്‍ത്തിനായി വിഹിതം അടയ്ക്കാന്‍ നിര്‍ബ്ബന്ധിക്കപ്പെടുന്നത്.  തവറകളും കൊട്ടാരങ്ങളും തമ്മിലോ വറുതിയും ആര്‍ഭാടവും തമ്മിലോ ഉള്ള ഒരു ഉടമ്പടിയല്ല സര്‍ക്കാര്‍. അത് സ്ഥാപിതമായത് ഒന്നുമില്ലാത്തവന്റെ കൈയിലെ ചില്ലിക്കാശ് കൊള്ളയടിച്ച് ദുഷ്ടന്മാരുടെ കൊള്ളരുതായ്മകൾക്ക് ചൂട്ടുപിടിക്കാൻ വേണ്ടിയല്ല.”

    ഭഗത് സിങ്ങിന്റെ ‘ജയിൽ ഡയറി’യിൽ നിന്ന്‌

    Bhagath Sing / Bhagathsingh

    പേജ് 398 വില രൂ360

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  • நான் நாத்திகன் ஏன் ?

    நான் நாத்திகன் ஏன் ?

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    நான் நாத்திகன் ஏன் ?

    .
    .

    மாவீரன் பகத்சிங்

     

    ”கற்றுனர் – எதிராளிகளின் பலமான ஆட்சேபங்களுக்கு அச்சமின்றி ஆணித்தரமான ஆப்புகளும் கண்டனங்களும் கொடுப்பதற்காகக் கற்றுணர். உன்னுடைய இலட்சியம், கொள்கை இவைகளின் போக்கைப் பரிசீலனை வாதங்களால் பாதுகாத்துக் கொள்ளும் பொருட்டுக் கற்றுணர்.”

     

    தமிழில் : ப ஜீவானந்தம்

    Bhagath Singh Bahath Singh

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  • Bhagath Singh Krithikal ഭഗത് സിംഗ് 3 കൃതികൾ

    ഭഗത് സിംഗ് 3 കൃതികൾ – ഭഗത് സിംഗ്

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    ഭഗത് സിംഗ് 3 കൃതികൾ – ഭഗത് സിംഗ്

    ഭഗത് സിംഗ് 3 കൃതികൾ

     

    …സർവശക്തനും സർവശ്രേഷ്ഠനുമായ ഒരു ദൈവത്തിന്റെ അസ്തിത്വത്തെ ഞാൻ നിഷേധിക്കുന്നു…
    ഭഗത് സിംഗ് ലാഹോർ സെൻട്രൽ ജയിലിൽ തടവുകാരനായി കഴിയുന്ന സമയം. സ്വാതന്ത്ര്യസമര സേനാനിയായിരുന്ന രൺധീർ സിംഗ് ജയിലിൽ അടയ്ക്കപ്പെട്ടു. അദ്ദേഹം വലിയ ഈശ്വര ഭക്തനായിരുന്നു. ഭഗത് സിംഗിനെ സന്ദർശിച്ചു, ഈശ്വരവിശ്വാസത്തിന്റെ ആവശ്യകത ഭഗത് സിംഗിനെ ബോധ്യപ്പെടുത്താൻ അദ്ദേഹം ഉപദേശിച്ചു നോക്കി. ഫലമില്ലെന്നു കണ്ടപ്പോൾ അദ്ദേഹത്തിനു ദേഷ്യം വന്നു. പ്രശസ്തികൊണ്ട് നീ അന്ധനായിരിക്കുകയാണെന്നു ശകാരിച്ചുകൊണ്ട് അദ്ദേഹം പോയി. അതിനെ തുടർന്ന് അദ്ദേഹം എഴുതിയ ഒരു ചെറിയ കൃതിയാണ് ‘ഞാൻ എന്തുകൊണ്ട് നിരീശ്വരവാദിയായി’.
    …സർവശക്തനും സർവശ്രേഷ്ഠനുമായ ഒരു ദൈവത്തിന്റെ അസ്തിത്വത്തെ ഞാൻ നിഷേധിക്കുന്നു. ഞാൻ നിരീശ്വരവാദിയായത് അടുത്ത കാലത്തൊന്നുമല്ല. ചെറുപ്പത്തിൽതന്നെ ഞാൻ ദൈവത്തിൽ വിശ്വസിക്കാത്തവനായിത്തീർന്നു. .. വിഗ്രഹാരാധനയ്ക്കും സങ്കുചിത മതവീക്ഷണത്തിനെതിരെയും പൊരുതുന്നതോടൊപ്പം തന്നെ സമൂഹം ഈശ്വരവിശ്വാസത്തിനെതിരെയും പോരാടേണ്ടതുണ്ട്… അദ്ദേഹം അതിൽ എഴുതി.
    ഇന്ത്യയുടെ സ്വാതന്ത്ര്യസമര പഥത്തിൽ അഗ്നിജ്വാലയായിമാറിയ വിപ്ലവകാരിയായിരുന്നു ഭഗത് സിംഗ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ ജീവിതം, വ്യക്തിത്വം, ആശയങ്ങൾ രചനകൾ, പോരാട്ടങ്ങൾ കേസുവിചാരണകൾ, രക്തസാക്ഷിത്വം തുടങ്ങിയവയെപ്പറ്റി നേർവെളിച്ചം നൽകുന്ന മൂന്നു കൃതികൾ.
    ബ്രിട്ടീഷ് സാമ്രാജ്യത്തിനെതിരെ ധീരവും സാഹസികവുമായ ദൗത്യങ്ങൾ ഏറ്റെടുത്ത ഭഗത് സിംഗ് ജനങ്ങളുടെ ഹൃദയത്തിൽ സ്ഥിരപ്രതിഷ്ഠനേടിയത് എങ്ങനെയെന്ന് ഈ പുസ്തകങ്ങൾ വായിക്കുമ്പോൾ വായനക്കാർക്ക് ഗ്രഹിക്കാനാകും.
    1. / ജയില് നോട്ട്ബുക്ക്:
    ഭഗത് സിംഗിന്റെ നോട്ടുബുക്കിലെ കുറിപ്പുകള് കേവലം കുറിപ്പുകളല്ല, ജന്മനാടിന്റെ മോചനത്തിനായുള്ള ഭഗത് സിംഗിന്റെ അന്വേഷണപാതയിലെ ഖനികളാണ്. സ്വാതന്ത്ര്യസമരത്തെ ആത്യന്തികമായും സോഷ്യലിസത്തിലേയ്ക്കുള്ള ഉരക്കല്ലാക്കിമാറ്റാന് അറിവുതേടലാണ് ആവശ്യം എന്ന ബോധ്യങ്ങളാണ് കൊച്ചു കൊച്ചു കുറിപ്പുകളായി ഭഗത് സിംഗ് കുറിച്ചിട്ടത്. സോഷ്യലിസത്തിലേക്കുള്ള പാത വിപ്ലവത്തിന്റേതാണ് എന്ന തിരിച്ചറിവില് ഊന്നിനിന്ന് ഭഗത് സിംഗിന്റെ കുറിപ്പുകള് മാര്ക്‌സിസം മുതല് ഗ്രീക്കു തത്വചിന്തവരെയുള്ള പരിപ്രേക്ഷ്യങ്ങളിലേക്കു പോകുന്നു. [ പേജ് 164 ]
    2. / യുവാക്കളായ രാഷ്ട്രീയപ്രവർത്തകരോട് ഭഗത് സിംഗ്:
    സാമ്രാജ്യത്വത്തിനെതിരെ വെല്ലുവിളിച്ച് അവസാനശ്വാസത്തിലും ഇങ്ക്വിലാബ് സിന്ദാബാദ് എന്ന് മുദ്രവാക്യം വിളിച്ച് ഭഗത് സിംഗിന് രക്തസാക്ഷിയാകേണ്ടി വന്നത് അദ്ദേഹത്തിനുള്ളിൽ ഒരു കമ്മ്യൂണിസ്റ്റുകാരൻ ഉള്ളതുകൊണ്ടാണ്.
    ഇന്ത്യയിലെ ആദ്യകാല കമ്മ്യൂണിസ്റ്റായ ഭഗത് സിംഗിന്റെ വിപ്ലവാത്മകമായ രാഷ്ട്രീയ ലേഖനങ്ങളുടെയും പ്രസംഗളുടെയും ശേഖരം. [പേജ് 82 ]
    3. / ഞാൻ എന്തുകൊണ്ട് നിരീശ്വവാദിയായി:
    ആത്മീയവാദത്തിന്റെയും ചിറകരിഞ്ഞു തകർത്ത ഭഗത് സിംഗിന്റെ ഈ കൃതി ഇന്ത്യയിലെ മുഴുവൻ ഭൗതികവാദികൾക്കും വഴികാട്ടികയാണ്. [ പേജ് 36 ]
    Bhagath Singh / Bhagat Sing  / Bagath Singh
    ആകെ പേജുകൾ 282 വില രൂ265
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  • Yuvakkalaya Rashtreeya Pravarthakarodu - Bhagat Singh യുവാക്കളായ രാഷ്ട്രീയപ്രവർത്തകരോട് - ഭഗത് സിംഗ്

    യുവാക്കളായ രാഷ്ട്രീയപ്രവർത്തകരോട് – ഭഗത് സിംഗ്

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    യുവാക്കളായ രാഷ്ട്രീയപ്രവർത്തകരോട് – ഭഗത് സിംഗ്

    യുവാക്കളായ രാഷ്ട്രീയപ്രവർത്തകരോട് ഭഗത് സിംഗ്

     

    ബ്രിട്ടീഷുകാരുടെ മുന്നിൽ മുട്ടുമടക്കി, മാപ്പെഴുതി കൊടുത്ത പാരമ്പര്യമായിരുന്നു ഹിന്ദുത്വരാഷ്ട്രീയത്തിന്റെ അമരക്കാരനായ സവർക്കർ ചെയ്തതെങ്കിൽ, സാമ്രാജ്യത്വത്തിനെതിരെ വെല്ലുവിളിച്ച് അവസാനശ്വാസത്തിലും ഇങ്ക്വിലാബ് സിന്ദാബാദ് എന്ന് മുദ്രവാക്യം വിളിച്ച് ഭഗത് സിംഗിന് രക്തസാക്ഷിയാകേണ്ടിവന്നത് അദ്ദേഹത്തിന്റെ ഒരു കമ്മ്യൂണിസ്റ്റുകാരൻ ഉള്ളതുകൊണ്ടാണ്.

    ഇന്ത്യയിലെ ആദ്യകാല കമ്മ്യൂണിസ്റ്റായ ഭഗത് സിംഗിന്റെ വിപ്ലവാത്മകമായ രാഷ്ട്രീയ ലേഖനങ്ങളുടെയും പ്രസംഗളുടെയും ശേഖരം.

    Bhagat Sing / Bhagath sing

    പേജ് 82 വില രൂ80

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  • Bhagath Singh ഭഗത് സിംഗ്

    ഭഗത് സിംഗ്

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    ഭഗത് സിംഗ്

    ഭഗത് സിംഗ്

     

    കെ എം ചന്ദ്രശർമ്മ

    ഇന്ത്യയുടെ സ്വാതന്ത്ര്യസമര പഥത്തിൽ അഗ്നിമുഹൂർത്തങ്ങൾ സൃഷ്ടിച്ച വിപ്ലവകാരിയായിരുന്നു ഭഗത് സിംഗ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ ജീവിതം, വ്യക്തിത്വം, ആശയങ്ങൾ, രചനകൾ, പോരാട്ടങ്ങൾ, കേസുവിചാരണകൾ, രക്തസാക്ഷിത്വം തുടങ്ങിയവയെപ്പറ്റി നേർവെളിച്ചം നൽകുന്ന ഗ്രന്ഥമാണിത്. ഇരുപതാം നൂറ്റാണ്ടിലെ ആദ്യ ദശകങ്ങളലെ ഇന്ത്യയുടെ രാഷ്ട്രീയസ്ഥിതി ഇവിടെ ചർച്ചചെയ്യുന്നു.

    ഭഗത് സിംഗിനെപ്പറ്റി ഇത്തരമൊരു സമഗ്രരചന മലയാളത്തിൽ വിരളമാണ്.

    Bhagat Singh / Bhagat Sing

    പേജ് 178 വില രൂ140

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  • Bhagath Singhum Samara Sakhakkalum ഭഗത് സിംഗും സമര സഖാക്കളും

    ഭഗത് സിംഗും സമര സഖാക്കളും – അജയഘോഷ്

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    ഭഗത് സിംഗും സമര സഖാക്കളും – അജയഘോഷ്

    ഭഗത് സിംഗും സമര സഖാക്കളും
    അജയഘോഷ്

    പരിഭാഷ – സി ആർ രാമചന്ദ്രൻ

    ധീരതയുടെ പര്യായമാണ് ഭഗത് സിംഗ്. തടവിലാക്കപ്പെട്ടപ്പോഴും തൂക്കിലേറ്റിയപ്പോഴും ആ ധീരതയുടെ ഉൾക്കനം നമ്മൾ കണ്ടതാണ്. ഇന്ത്യയിൽ കരുത്തുറ്റ ഒരു ഇടതുപക്ഷ ജനാധിപത്യ പ്രസ്ഥാനം കെട്ടിപ്പെടുക്കാൻ അഹോരാത്രം യത്‌നിച്ച സഖാവ് അജയഘോഷും ഇന്ത്യൻ സ്വാതന്ത്ര്യത്തിനായി ദാഹിച്ച ഭഗത് സിംഗുമായുള്ള ആദ്യത്തെ കൂടിക്കാഴ്ചയെപ്പറ്റിയും സ്വതന്ത്ര്യ സമരത്തിലെ തുടർന്നുള്ള ഉദ്വേസജനകമായ സംഭവ പരമ്പരകളെപ്പറ്റിയുമുള്ള ഓർമക്കുറിപ്പുകളാണ് ഈ ഗ്രന്ഥത്തിലെ ഉള്ളടക്കം.

    Bhagat Singh

    പേജ് 82 വില രൂ65

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  • Jnan Enthukondu Nireeswaravadi Ayi ഞാൻ എന്തുകൊണ്ട് നിരീശ്വവാദിയായി

    ഞാൻ എന്തുകൊണ്ട് നിരീശ്വവാദിയായി – ഭഗത് സിംഗ്

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    ഞാൻ എന്തുകൊണ്ട് നിരീശ്വവാദിയായി – ഭഗത് സിംഗ്

    ഞാൻ എന്തുകൊണ്ട് നിരീശ്വവാദിയായി

     

    ഭഗത് സിംഗ്

     

    ഇന്ത്യൻ സ്വാതന്ത്ര്യസമര ചരിത്രത്തിലെ ജ്വലിക്കുന്ന താരമായിരുന്ന ഭഗത് സിംഗ്. സ്വാതന്ത്ര്യ സമര സേനാനികൾക്ക് ആവേശം പകർന്ന മഹത്തായ വിപ്ലവചിന്തയ്ക്ക് എന്നും പ്രചോദനം നൽകിയത് അദ്ദേഹത്തിന്റെ ഭൗതികവാദ അടിത്തറയായിരുന്നു. ആസ്തികവാദികൾക്കെതിരെ ആശയപരമായി കൊടുങ്കാറ്റഴിച്ചുവിട്ട നിരീശ്വരവാദിയായിരുന്നു ഭഗത് സിംഗ് എന്നറിഞ്ഞിട്ടും അദ്ദേഹത്തിന്റെ നാമം ദുരുപയോഗപ്പെടുത്തുന്ന കാവിപ്പടയുടെ നീക്കം തികച്ചും വഞ്ചനാത്മകമാണ്. ഈശ്വരവിശ്വാസത്തിന്റെയും ആത്മീയവാദത്തിന്റെയും ചിറകരിഞ്ഞു തകർത്ത ഭഗത് സിംഗിന്റെ ഈ കൃതി ഇന്ത്യയിലെ മുഴുവൻ ഭൗതികവാദികൾക്കും വഴികാട്ടികയാണ്.

    Bhagat Singh / Bagath Sing / Why I am An Atheist 

    പേജ് 36 വില രൂ35

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  • Why I am an Atheist - Book written by Bhagat Singh

    Why I Am An Atheist – Bhagat Singh

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    Why I Am An Atheist – Bhagat Singh

    His Articles, Letters And Biography

    ”It is necessary for every person who stands for progress to criticise every tenet of old  beliefs”.

     

    Chapters —

    Why I am An Atheist.
    Brief Biography.
    What Is Revolution?
    Bhagat Singh And The National Movement.
    Early Influences.
    Open Letter To His Father.

    ”Merciless criticism and independent thinking are the two necessary traits of a revolutionary” – Bhagat Singh

    Page: 40

    Bhagath Singh / Sing  

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  • Jail Notebook ജയില്‍ നോട്ട്ബുക്ക്

    ജയില്‍ നോട്ട്ബുക്ക് – ഭഗത് സിംഗ്

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    ജയില്‍ നോട്ട്ബുക്ക് – ഭഗത് സിംഗ്

    ജയില്‍ നോട്ട്ബുക്ക്

     

    ഭഗത് സിംഗ്

     

    ഭഗത് സിംഗിന്റെ നോട്ടുബുക്കിലെ കുറിപ്പുകള്‍ കേവലം കുറിപ്പുകളല്ല, ജന്മനാടിന്റെ മോചനത്തിനായുള്ള ഭഗത് സിംഗിന്റെ അന്വേഷണപാതയിലെ ഖനികളാണ്. സ്വാതന്ത്ര്യസമരത്തെ ആത്യന്തികമായും സോഷ്യലിസത്തിലേയ്ക്കുള്ള ഉരക്കല്ലാക്കിമാറ്റാന്‍ അറിവുതേടലാണ് ആവശ്യം എന്ന ബോധ്യങ്ങളാണ് കൊച്ചു കൊച്ചു കുറിപ്പുകളായി ഭഗത് സിംഗ് കുറിച്ചിട്ടത്. സോഷ്യലിസത്തിലേക്കുള്ള പാത വിപ്ലവത്തിന്റേതാണ് എന്ന തിരിച്ചറിവില്‍ ഊന്നിനിന്ന് ഭഗത് സിംഗിന്റെ കുറിപ്പുകള്‍ മാര്‍ക്‌സിസം മുതല്‍ ഗ്രീക്കു തത്വചിന്തവരെയുള്ള പരിപ്രേക്ഷ്യങ്ങളിലേക്കു പോകുന്നു.

    പരിഭാഷ – എം പി ഷീജ

    ML / Malayalam / Bhagat Singh / Bhagath Singh / M P Sheeja

    പേജ് 164 വില രൂ150

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